बालाघाट। जिले के डोंगरिया गांव में स्थित एक पुराने सरकारी तालाब की जमीन पर कथित अवैध कब्जा और प्लाटिंग का मामला सामने आया है। करीब 7 एकड़ से अधिक क्षेत्र में फैले इस तालाब पर निर्माण गतिविधियों को लेकर ग्रामीणों ने विरोध जताते हुए प्रशासन से कार्रवाई की मांग की है।
ग्रामीणों का आरोप है कि प्रभावशाली लोगों द्वारा तालाब की जमीन पर मिट्टी डालकर उसे समतल किया जा रहा है और वहां अवैध रूप से प्लॉट काटकर बेचे जा रहे हैं। ग्रामीणों के मुताबिक विवादित भूमि के अधिकांश प्लॉट पहले ही बेचे जा चुके हैं, जिससे सरकारी संपत्ति पर अतिक्रमण का खतरा और बढ़ गया है।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि राजस्व रिकॉर्ड में हेरफेर कर तालाब की जमीन को दूसरी भूमि के रूप में दर्शाने की कोशिश की गई। मामले में तत्कालीन पटवारी की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। ग्रामीणों ने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
जल संकट की आशंका से चिंतित ग्रामीण
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह तालाब वर्षों से क्षेत्र के जल संरक्षण का प्रमुख स्रोत रहा है। यदि तालाब का अस्तित्व खत्म होता है तो भूजल स्तर पर असर पड़ेगा और आने वाले समय में क्षेत्र को जल संकट का सामना करना पड़ सकता है।
लंबे समय से कर रहे थे शिकायत
ग्रामीणों का दावा है कि उन्होंने इस मामले की शिकायत कई बार संबंधित अधिकारियों से की थी, लेकिन समय पर कार्रवाई नहीं होने के कारण अतिक्रमण लगातार बढ़ता गया। अब ग्रामीण एकजुट होकर तालाब को बचाने के लिए आंदोलन की तैयारी कर रहे हैं।
एसडीएम ने मौके पर पहुंचकर सुनी शिकायतें
मामले के तूल पकड़ने के बाद वारासिवनी एसडीएम कार्तिकेय जायसवाल मौके पर पहुंचे। उन्होंने ग्रामीणों से चर्चा कर पूरे मामले की जानकारी ली और स्थल का निरीक्षण किया।
एसडीएम ने कहा कि मामले की विस्तृत जांच कराई जाएगी। यदि जांच में किसी भी व्यक्ति की भूमिका अवैध कब्जे या राजस्व रिकॉर्ड में गड़बड़ी के रूप में सामने आती है, तो उसके खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।
फिलहाल ग्रामीणों की नजर प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई है। लोगों का कहना है कि तालाब जैसी सार्वजनिक संपत्ति को बचाने के लिए दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई जरूरी है, ताकि भविष्य में इस तरह के मामलों पर रोक लगाई जा सके।

