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900 एमएसएमई यूनिट को सीएम डॉ. मोहन यादव ने दिए 360 करोड़, कहा- सबसे तेज गति से आगे बढ़ रहा एमपी

भोपाल में आयोजित हुआ ‘समृद्ध एमएसएमई-विकसित मप्र’ कार्यक्रम, उद्यमियों को भूमि आवंटन के लिए प्रदान किए आशय पत्र

भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 14 जून को भोपाल के कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में आयोजित “समृद्ध एमएसएमई-विकसित मध्यप्रदेश” कार्यक्रम में मुख्य आतिथ्य के रूप में शामिल हुए। उन्होंने कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलित कर किया। इस मौके पर उन्होंने सिंगल क्लिक से 900 एमएसएमई यूनिट्स को 360 करोड़ की राशि प्रदान की। उन्होंने उद्यमियों को भूमि आवंटन के लिए आशय पत्र भी वितरित किए। कार्यक्रम में मध्यप्रदेश स्टार्टअप पॉलिसी के अंतर्गत उद्यमियों को सहायता राशि के चेक सौंपे गए और मुख्यमंत्री उद्यम क्रांति योजना के हितग्राहियों को ऋण राशि के चेक दिए गए।

कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत दुनिया में अलग आर्थिक शक्ति के रूप में उभर रहा है। उज्जैन में सिंहस्थ के माध्यम से प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में हम सभी अमृत स्नान करेंगे। देश में ऐसा केंद्रीय नेतृत्व है, जो हर क्षेत्र में सफलता के नए कीर्तिमान गढ़ रहा है। आज अमेरिका जैसा शक्तिशाली देश भी प्रधानमंत्री मोदी के आने का इंतजार करता है। हमने मुख्यमंत्री के रूप में गुजरात में उनके कार्यकाल को देखा है।

देश के महान उद्योगपति स्व. रतन टाटा ने देशवासियों को एक लाख रुपए में कार देने का सपना देखा था। जब तत्कालीन पश्चिम बंगाल सरकार में उन्हें उद्योग स्थापित करने के लिए जमीन नहीं मिली तो उन्होंने गुजरात का रुख किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उद्यमियों से संवाद किया और प्रदेश में नए उद्योग स्थापित के लिए पूर्ण सहायता का भरोसा दिया। उन्होंने कहा कि विकसित भारत को ध्यान में रखते हुए मध्यप्रदेश सरकार ने वर्ष 2047 तक एक करोड़ पंजीकृत एमएसएमई इकाइयों का लक्ष्य निर्धारित किया है। इससे प्रदेश में 2 करोड़ से अधिक लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।

युवाओं को लगातार प्रोत्साहित कर रही सरकार

सीएम डॉ. यादव ने मीडिया से कहा कि मध्यप्रदेश सरकार अपने युवा उद्यमियों को लगातार प्रोत्साहित कर रही है। एमएसएमई इकाई के जरिये राज्य में लगभग सवा करोड़ से ज्यादा लोगों को रोजगार मिल रहा है। हमारी सरकार द्वारा एमएसएमई इकाइयों को मार्च 2026 तक करीब पौने चार करोड़ रुपये का देयक दिया जा चुका है। यह सरकार की ढाई साल की सबसे बड़ी उपलब्धि है। हम इन इकाइयों के साथ प्रदेश को आर्थिक मजबूत करने के लिए प्रतिबद्धता के साथ काम कर रहे हैं। हमारा राज्य औद्योगिक क्षेत्र में सबसे तेजी से आगे बढ़ रहा है। कृषि कल्याण वर्ष में हमने फूड-प्रोसेसिंग इकाई के लिए भी कई योजनाएं बनाई हैं। मैं उम्मीद करता हूं कि सभी इसका भी लाभ लेंगे।

उद्यमियों के साथ हर पल खड़ी सरकार

प्रमुख सचिव औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन एवं सूक्ष्म,लघु एवं मध्यम उद्यम विभाग राघवेंद्र सिंह ने बताया कि प्रदेश में 5 लाख 26 हजार मैन्यूफैक्चरिंग यूनिट्स हैं, जिनमें 42 हजार 700 करोड़ का निवेश है। इनसे करीब 44 लाख लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष तौर पर रोजगार मिल रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश सरकार ने उद्योग अनुकूल एमएसएमई पॉलिसी लागू की है। प्रदेश में पिछले ढाई वर्षों में निवेश सहायता के रूप में 6 हजार 136 एसएसएमई उद्यमियों को 3 हजार 723 करोड़ राशि दी गई है।

उसके पहले के ढाई साल में केवल 1245 करोड़ की राशि प्रदान की गई थी। अब तक उद्योग प्रोत्साहन राशि के रूप में तीन गुना अधिक राशि उद्यमियों की दी जा चुकी है। राज्य सरकार ने 31 मार्च 2026 तक के सभी देयकों का भुगतान कर चुकी है। उन्होंने कहा कि आज सिंगल क्लिक के माध्यम से 900 एमएसएमई यूनिट्स को 360 करोड़ की राशि दी गई है। प्रदेश में अभी 181 औद्योगिक क्षेत्र संचालित हैं। प्रदेश की नई औद्योगिक नीति तीव्र, पारदर्शी और उद्योग अनुकूल है। पिछले एक वर्ष में उद्यमियों को 1000 से अधिक भूखंड आवंटित किए गए हैं। प्रदेश में 44 नए औद्योगिक क्षेत्र और क्लस्टर प्रस्तावित हैं।

उद्यमियों के लिए वरदान सिद्ध हो रही सरकार की दूरदृष्टि

लघु उद्योग भारती के प्रदेशाध्यक्ष राजेश मिश्रा ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश में पिछले ढाई साल में औद्योगिक विकास को तेज गति प्रदान की है। भारत कृषि प्रधान देश से पहले उद्योग प्रधान देश भी रहा है। 1750 ईस्वी के आसपास विश्व की मैन्यूफैक्चरिंग में भारत की हिस्सेदारी 35 प्रतिशत थी, जो अब केवल 2 प्रतिशत के आसपास है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में लघु उद्योग भारती देश के विभिन्न राज्यों से मध्यप्रदेश में निवेश लाने के लिए प्रयास कर रही है।

राज्य सरकार पूरी पारदर्शिता के साथ उद्यमियों की सहायता कर रही है। सरकार की दूरदृष्टि उद्यमियों के लिए वरदान सिद्ध हो रहे हैं। कार्यक्रम में अलाना कंपनी की संस्थापक राशि मेहरा ने अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश से शुरु हुआ अलाना लिप केयर ब्रांड की शुरुआत आसान नहीं थी, आज हमारा ग्रुप देश-विदेश में अपने प्रोडक्ट्स सप्लाई कर रहा है। उद्यमी कुनाल ज्ञानी ने बताया कि हमने मध्यप्रदेश से एक छोटी एमएसएमई यूनिट शुरू की थी। आज देश के 5 राज्यों में हमारी ईकाइयां हैं और अब यूके में भी खुलने जा रही है। मध्यप्रदेश को भारत का दिल कहते हैं, जिसमें उद्योग संचालन की लागत सबसे कम है।

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