भोपाल। मध्य प्रदेश में मानसून की दस्तक में हो रही देरी ने किसानों की चिंताएं बढ़ा दी हैं। मौसम विभाग के अनुसार प्रदेश में मानसून अब 22 से 24 जून के बीच प्रवेश कर सकता है। फिलहाल मानसून पश्चिमी तट पर ही रुका हुआ है और अभी तक मुंबई भी नहीं पहुंच पाया है। इसके बाद छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र होते हुए मध्य प्रदेश में इसके आने की संभावना है। इस बीच प्रदेश में अगले तीन दिनों तक हीटवेव का असर बने रहने की चेतावनी भी जारी की गई है।
बारिश के आंकड़े भी किसानों के लिए निराशाजनक हैं। मौसम विभाग के अनुसार 1 से 17 जून के बीच प्रदेश में सामान्य तौर पर 41.6 मिमी (करीब 1.6 इंच) वर्षा दर्ज होती है, लेकिन इस वर्ष अब तक केवल 25.8 मिमी (लगभग 1 इंच) बारिश हुई है। यानी प्रदेश में सामान्य से करीब 37 प्रतिशत कम वर्षा हुई है।
कम बारिश का सबसे बड़ा असर खरीफ फसलों की बुवाई पर पड़ रहा है। किसान सोयाबीन, उड़द, मूंग और तुअर जैसी फसलों की बोवनी शुरू नहीं कर पा रहे हैं। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि बुवाई के लिए खेतों में पर्याप्त नमी जरूरी होती है, जिसके लिए कम से कम 4 इंच बारिश होना आवश्यक है। पर्याप्त नमी के बिना बोवनी करने पर बीज खराब होने का खतरा बढ़ जाता है।
कई जिलों में किसानों ने मानसून के समय पर आने की उम्मीद में सोयाबीन की बुवाई कर दी थी, लेकिन बारिश नहीं होने से उनके सामने बीज खराब होने और दोबारा बोवनी करने की आशंका खड़ी हो गई है। हालांकि जिन किसानों के पास सिंचाई की सुविधा उपलब्ध है, उन्हें कुछ राहत मिल सकती है।
अलीराजपुर में बूंद भी नहीं गिरी
बारिश के मामले में सबसे खराब स्थिति आलीराजपुर की है, जहां अब तक वर्षा दर्ज ही नहीं हुई है। इसके अलावा बालाघाट, दमोह, कटनी, मैहर, रीवा, शहडोल, टीकमगढ़, बड़वानी, भिंड, दतिया, धार और खरगोन में आधा इंच से भी कम बारिश रिकॉर्ड की गई है।
भोपाल में 91.9 मिमी बारिश दर्ज
वहीं भोपाल प्रदेश का एकमात्र जिला है, जहां औसत 91.9 मिमी (साढ़े तीन इंच से अधिक) वर्षा दर्ज की गई है। इसके अलावा आगर-मालवा, बुरहानपुर, देवास, गुना, हरदा, इंदौर, मंदसौर, नर्मदापुरम, नीमच, रायसेन, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, श्योपुर, शिवपुरी, विदिशा, डिंडौरी, सतना और सीधी में 1 से ढाई इंच तक बारिश हुई है। हालांकि कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यह मात्रा भी खरीफ फसलों की व्यापक बुवाई के लिए पर्याप्त नहीं है।

