मुंबई। अगर किसी निवेशक का निधन हो जाता है और उसके नाम पर शेयर, बॉन्ड या अन्य सिक्योरिटीज मौजूद हैं, तो अब उन्हें कानूनी वारिसों के नाम ट्रांसफर कराना पहले की तुलना में काफी आसान होगा। भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) ने ट्रांसमिशन प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए कई बड़े फैसले लिए हैं, जिससे परिवारों को लंबी कानूनी और दस्तावेजी प्रक्रियाओं से राहत मिलेगी।
SEBI का बड़ा फैसला
जानकारी अनुसार, SEBI बोर्ड की हालिया बैठक में मृतक निवेशकों की सिक्योरिटीज को उनके कानूनी उत्तराधिकारियों और दावेदारों के नाम ट्रांसफर करने की प्रक्रिया को आसान बनाने की मंजूरी दी गई। नए नियमों का उद्देश्य निवेशकों के परिवारों को कम कागजी कार्रवाई और तेज प्रक्रिया का लाभ देना है। SEBI ने छोटे निवेश दावों (Small Value Claims) के लिए नई श्रेणी बनाई है-
फिजिकल शेयरों के लिए
- प्रति शेयर मूल्य ₹10,000 तक
डीमैट शेयरों के लिए
- प्रति शेयर मूल्य ₹30,000 तक
इससे छोटे निवेशकों के परिवारों को दावे निपटाने में ज्यादा सुविधा मिलेगी।
स्मॉल वैल्यू क्लेम लिमिट हुई दोगुनी
SEBI ने छोटे दावों की सीमा में भी बड़ा इजाफा किया है।
नई सीमा
- फिजिकल शेयर: ₹10 लाख तक
- डीमैट शेयर: ₹30 लाख तक
पहले की तुलना में यह सीमा लगभग दोगुनी कर दी गई है।
PAN कार्ड जमा करने की जरूरत खत्म
साथ ही नए नियमों के तहत अब ट्रांसमिशन प्रक्रिया के दौरान अलग से PAN कार्ड जमा नहीं करना होगा। SEBI के अनुसार, डीमैट अकाउंट खोलते समय PAN पहले ही अनिवार्य रूप से जमा किया जाता है, इसलिए दोबारा इसकी मांग करने की आवश्यकता नहीं है।
प्रोबेट (Probate) की अनिवार्यता भी समाप्त
SEBI ने वसीयत के अदालत द्वारा प्रमाणित दस्तावेज यानी Probate की अनिवार्यता भी खत्म कर दी है।
प्रोबेट क्या होता है?
प्रोबेट वह कानूनी दस्तावेज है जिससे अदालत यह प्रमाणित करती है कि वसीयत वैध और सही है। अब उत्तराधिकार कानूनों में हुए बदलावों के बाद यह प्रक्रिया आसान बना दी गई है।
अलग-अलग दस्तावेजों की जगह एक ही NOC
वहीं पहले निवेशकों को कई तरह के एफिडेविट और NOC जमा करने पड़ते थे। अब SEBI ने इन्हें सरल बनाते हुए Combined Affidavit-cum-NOC को मान्यता दी है, जिससे दस्तावेजी बोझ काफी कम होगा।
अब ट्रांसमिशन प्रक्रिया में QR Code युक्त मृत्यु प्रमाण पत्र (Death Certificate) का उपयोग भी किया जा सकेगा। इससे दस्तावेजों की सत्यता जांचना आसान होगा और प्रक्रिया तेज होगी। SEBI ने ओपन मार्केट शेयर बायबैक को दोबारा शुरू करने की मंजूरी दी है।
क्या होता है ओपन मार्केट बायबैक?
जब कोई कंपनी स्टॉक एक्सचेंज के माध्यम से अपने ही शेयर निवेशकों से वापस खरीदती है, तो उसे Open Market Buyback कहा जाता है। इस फैसले से कंपनियों को अधिक लचीलापन मिलेगा और निवेशकों के हितों की बेहतर सुरक्षा सुनिश्चित होगी।
म्यूचुअल फंड कंपनियों को भी राहत
बता दें SEBI ने म्यूचुअल फंड हाउसों को लिक्विडिटी संकट से निपटने के लिए Intraday Borrowing यानी एक दिन के लिए उधार लेने की सुविधा को भी आसान बना दिया है। इससे फंड मैनेजमेंट और नकदी प्रबंधन बेहतर हो सकेगा।
SEBI चेयरमैन ने सेल्फ-लिस्टिंग पर क्या कहा?
SEBI चेयरमैन तुहिन कांत पांडेय ने स्पष्ट किया कि फिलहाल रेगुलेटर किसी भी प्रकार की Self Listing की अनुमति देने पर विचार नहीं कर रहा है।
Self Listing क्या होती है?
जब कोई स्टॉक एक्सचेंज खुद अपने ही प्लेटफॉर्म पर सूचीबद्ध (Listed) होना चाहता है, तो उसे Self Listing कहा जाता है।

