Friday, November 6, 2026
Contact: +91 97559 93555
Email: tathyawani@gmail.com
spot_img
Hometrending newsसुप्रीम कोर्ट से नहीं मिली तत्काल राहत, भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले...

सुप्रीम कोर्ट से नहीं मिली तत्काल राहत, भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले में जल्द सुनवाई से इनकार

भोजपुर। भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले में सुप्रीम कोर्ट से याचिकाकर्ता को तत्काल राहत नहीं मिली है। सर्वोच्च अदालत ने मामले की जल्द सुनवाई की मांग को स्वीकार करने से इनकार करते हुए याचिकाकर्ता को रजिस्ट्रार के समक्ष मामला मेंशन करने की सलाह दी है। इस घटनाक्रम के बाद एक बार फिर कथित एनकाउंटर को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर बहस तेज हो गई है।

क्या है पूरा मामला?

बिहार के भोजपुर जिले में बिलौती गांव निवासी भरत भूषण तिवारी की पुलिस मुठभेड़ में हुई मौत को लेकर सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई है। याचिका सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता विशाल तिवारी द्वारा दाखिल की गई है, जिसमें इस घटना को कथित फर्जी एनकाउंटर बताते हुए स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की मांग की गई है। याचिका में कहा गया है कि एनकाउंटर में शामिल पुलिस अधिकारियों के खिलाफ FIR दर्ज की जाए और पूरे मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंपी जाए।

रिटायर्ड सुप्रीम कोर्ट जज की निगरानी में जांच की मांग

साथ ही याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट से यह भी अनुरोध किया है कि मामले की जांच के लिए एक स्वतंत्र विशेषज्ञ समिति गठित की जाए, जिसकी अध्यक्षता सर्वोच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश करें। याचिका में दावा किया गया है कि यह मामला न्यायेतर हत्या (Extra Judicial Killing) का प्रतीत होता है, इसलिए इसकी निष्पक्ष जांच बेहद जरूरी है।

बिहार सरकार ने भी बैठाई न्यायिक जांच

बता दें मामले की गंभीरता को देखते हुए बिहार सरकार ने भी स्वतंत्र न्यायिक जांच के आदेश दिए हैं। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने घोषणा की है कि पूरे घटनाक्रम की जांच उच्च न्यायालय के एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश की निगरानी में कराई जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि जांच के जरिए घटना के हर पहलू की पारदर्शी और निष्पक्ष पड़ताल सुनिश्चित की जाएगी, ताकि सच्चाई सामने आ सके।

चार पुलिसकर्मी निलंबित, वीडियो ने बढ़ाए सवाल

इस बीच बिहार पुलिस ने मामले में कार्रवाई करते हुए एक थाना प्रभारी समेत चार पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया है। यह कदम सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक कथित वीडियो के सामने आने के बाद उठाया गया, जिसमें भरत भूषण तिवारी पुलिस के सामने हथियार लिए दिखाई दे रहे हैं।

वीडियो को लेकर अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं। कुछ लोगों का कहना है कि वीडियो में तिवारी हथियार फेंकते नजर आते हैं, जबकि पुलिस का दावा है कि उन्होंने लगातार पुलिस टीम पर फायरिंग की थी, जिसके जवाब में कार्रवाई की गई।

पुलिस के शुरुआती बयान में भरत भूषण तिवारी को मानसिक रूप से अस्वस्थ बताया गया था। हालांकि परिवार और स्थानीय लोगों का कहना है कि वह एक सामाजिक कार्यकर्ता थे और क्षेत्र की समस्याओं को प्रशासन तक पहुंचाने का काम करते थे। इसी विरोधाभास ने पूरे मामले को और अधिक संवेदनशील बना दिया है।

राजनीतिक गलियारों में भी मचा बवाल

वहीं एनकाउंटर को लेकर राजनीतिक दलों के बीच भी तीखी बयानबाजी शुरू हो गई है। भाजपा के कई नेताओं, जिनमें मंत्री मिथिलेश तिवारी, विधायक आनंद मिश्रा और पूर्व केंद्रीय मंत्री अश्विनी कुमार चौबे शामिल हैं, ने भी घटना पर सवाल उठाए हैं। राष्ट्रीय जनता दल के नेता तेजस्वी यादव ने इसे कथित फर्जी मुठभेड़ बताते हुए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से माफी मांगने की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार वास्तविक मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए ऐसे मामलों का इस्तेमाल कर रही है।

सुप्रीम कोर्ट द्वारा तत्काल सुनवाई से इनकार किए जाने के बाद अब याचिकाकर्ता को नियमित प्रक्रिया के तहत अगली तारीख का इंतजार करना होगा। दूसरी ओर न्यायिक जांच, CBI जांच की मांग और राजनीतिक विवादों के बीच यह मामला लगातार सुर्खियों में बना हुआ है।

RELATED ARTICLES

ई-पेपर

1 to 7 November 2026
25 to 31 October 2026

शासकीय निविदाएं

विज्ञापन