नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कैबिनेट में फेरबदल की चर्चाएं पिछले कई महीनों से तेज हैं। लेकिन फिलहाल यह साफ होता नजर आ रहा है कि मॉनसून सत्र से पहले मंत्रिमंडल विस्तार की संभावना बेहद कम है। सरकार इस समय संसद में परिसीमन (Delimitation) बिल और वन नेशन, वन इलेक्शन जैसे बड़े विधेयकों को प्राथमिकता दे रही है। इन विधेयकों की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही मंत्रिमंडल में बदलाव का रास्ता साफ होगा।
संसद पर सरकार का फोकस
सूत्रों के मुताबिक, केंद्र सरकार का ध्यान इस समय संसद के आगामी मॉनसून सत्र पर है। सरकार चाहती है कि महत्वपूर्ण संवैधानिक और चुनावी सुधारों से जुड़े विधेयकों को प्राथमिकता के आधार पर आगे बढ़ाया जाए। लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदनों में सरकार के पास दो-तिहाई बहुमत नहीं है। ऐसे में सहयोगी दलों के साथ तालमेल बनाए रखना सरकार की सबसे बड़ी रणनीतिक जरूरत मानी जा रही है।
PM मोदी और राष्ट्रपति के विदेशी दौरे भी बने वजह
जानकारी अनुसार, कैबिनेट विस्तार में देरी की एक बड़ी वजह प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति का व्यस्त कार्यक्रम भी है।
- राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का आंध्र प्रदेश दौरा।
- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जापान दौरा।
- राजस्थान का सरकारी कार्यक्रम।
- इसके बाद इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड की विदेश यात्रा।
इन लगातार कार्यक्रमों के कारण मंत्रिमंडल विस्तार के लिए पर्याप्त समय नहीं मिल पा रहा है।
मॉनसून सत्र से पहले बदलाव क्यों मुश्किल?
संभावना है कि संसद का मॉनसून सत्र जुलाई के तीसरे सप्ताह में शुरू होगा। यदि उससे ठीक पहले नए मंत्रियों को शपथ दिलाई जाती है, तो उन्हें मंत्रालय की जिम्मेदारियां समझने और संसद की तैयारी के लिए पर्याप्त समय नहीं मिलेगा। यही कारण है कि सरकार जल्दबाजी के बजाय रणनीतिक तरीके से फैसला लेना चाहती है।
किन मंत्रियों पर टिकी हैं निगाहें?
राजनीतिक गलियारों में कई मंत्रियों को लेकर चर्चाएं तेज हैं।
- कुछ मंत्रियों का राज्यसभा कार्यकाल समाप्त होने वाला है।
- कुछ नेताओं को संगठन में नई जिम्मेदारी मिल चुकी है।
- बीजेपी के “एक व्यक्ति-एक पद” सिद्धांत को भी ध्यान में रखा जा सकता है।
- कुछ राज्यों के चुनावों को देखते हुए कई मंत्रियों की भूमिका बदली जा सकती है।
कैबिनेट विस्तार में इन बातों पर रहेगा फोकस
सरकारी और राजनीतिक सूत्रों के अनुसार संभावित फेरबदल में कई अहम समीकरणों का ध्यान रखा जाएगा—
● प्रदर्शन आधारित मूल्यांकन
प्रधानमंत्री पहले ही मंत्रियों के कामकाज की समीक्षा कर चुके हैं। बेहतर प्रदर्शन करने वालों को जिम्मेदारी मिल सकती है।
● युवाओं को मिलेगा बड़ा मौका
सरकार युवा नेतृत्व को आगे लाने की रणनीति पर काम कर रही है। 50 वर्ष से कम उम्र के नेताओं को प्राथमिकता मिलने की संभावना है।
● महिलाओं की भागीदारी बढ़ सकती है
कैबिनेट में महिला प्रतिनिधित्व बढ़ाने पर भी विचार किया जा रहा है।
● चुनावी राज्यों को प्राथमिकता
अगले वर्ष जिन राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं, वहां के नेताओं को मंत्रिमंडल में जगह मिल सकती है।
● ओबीसी और सामाजिक संतुलन
मंत्रिमंडल विस्तार में सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन बनाए रखने के लिए ओबीसी समुदाय सहित विभिन्न वर्गों को प्रतिनिधित्व दिया जा सकता है।
12 वर्षों में चार बड़े कैबिनेट फेरबदल
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में अब तक चार प्रमुख मंत्रिमंडल विस्तार हो चुके हैं।
- 2014 – पहली बार 21 नए मंत्री शामिल।
- 2016 – 19 नए चेहरों की एंट्री।
- 2017 – 9 नए मंत्री, कई बड़े बदलाव।
- 2021 – सबसे बड़ा फेरबदल, 36 नए मंत्री शामिल और 12 मंत्रियों की विदाई।

