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पेट्रोल निर्यात पर विंडफॉल टैक्स बढ़ा, डीजल और ATF को राहत; 1 जुलाई से लागू होंगी नई दरें

नई दिल्ली ।केंद्र सरकार ने पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात पर लगने वाले विंडफॉल टैक्स (विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क) में बड़ा बदलाव किया है। वित्त मंत्रालय की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार नई दरें 1 जुलाई 2026 से अगले 15 दिनों के लिए लागू होंगी। सरकार ने पेट्रोल निर्यात पर टैक्स बढ़ाया है, जबकि डीजल और एविएशन टरबाइन फ्यूल (ATF) के निर्यात पर शुल्क में राहत दी गई है। हालांकि, घरेलू बाजार में बिकने वाले पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क (एक्साइज ड्यूटी) में कोई बदलाव नहीं किया गया है।

नई अधिसूचना के मुताबिक, पेट्रोल के निर्यात पर विंडफॉल टैक्स 1.50 रुपये प्रति लीटर से बढ़ाकर 4 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। वहीं डीजल पर विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क 14 रुपये से घटाकर 8.50 रुपये प्रति लीटर और विमान ईंधन (ATF) पर 12.50 रुपये से घटाकर 7.50 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है।

वित्त मंत्रालय ने बताया कि इन संशोधित दरों का उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय बाजार की मौजूदा परिस्थितियों और देश में ईंधन की पर्याप्त उपलब्धता के बीच संतुलन बनाए रखना है। सरकार हर 15 दिन में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल, पेट्रोल, डीजल और एटीएफ की औसत कीमतों की समीक्षा के आधार पर विंडफॉल टैक्स में बदलाव करती है। इससे पहले इन दरों में संशोधन 16 जून 2026 को किया गया था।

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि घरेलू उपभोक्ताओं के लिए पेट्रोल और डीजल की एक्साइज ड्यूटी में कोई बदलाव नहीं किया गया है। इसका मतलब है कि इस फैसले का पेट्रोल पंपों पर ईंधन की मौजूदा कीमतों पर तत्काल कोई सीधा असर नहीं पड़ेगा। यह बदलाव केवल निर्यात करने वाली तेल कंपनियों के कर भार को प्रभावित करेगा।

सरकार ने सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों को नेपाल, भूटान, बांग्लादेश और श्रीलंका को होने वाले निर्यात पर पहले से दी गई टैक्स छूट का दायरा बढ़ाते हुए अब मॉरीशस और मालदीव को भी इसमें शामिल कर लिया है।

गौरतलब है कि पश्चिम एशिया में बढ़े भू-राजनीतिक तनाव और ऊर्जा सुरक्षा को देखते हुए सरकार ने 27 मार्च 2026 से डीजल और एटीएफ तथा 16 मई 2026 से पेट्रोल के निर्यात पर विंडफॉल टैक्स लागू किया था। अब क्षेत्रीय परिस्थितियों में सुधार और वैश्विक बाजार में बदलाव के बाद टैक्स दरों में संशोधन किया गया है।

इस बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भी उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है। कुछ समय पहले जहां कच्चे तेल की कीमत 126 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थी, वहीं अब यह काफी नीचे आ चुकी है। विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया में तनाव कम होने और होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की सामान्य आवाजाही बहाल होने से वैश्विक आपूर्ति संबंधी चिंताएं घटी हैं। इसी वजह से वर्ष 2026 में ब्रेंट क्रूड की औसत कीमत का अनुमान घटाकर करीब 84.50 डॉलर प्रति बैरल कर दिया गया है, जो पहले 90.44 डॉलर प्रति बैरल आंका गया था।

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