धान के ₹3100 समर्थन मूल्य, ₹900 बोनस, खाद संकट, महंगाई और कानून-व्यवस्था पर उठाए सवाल
बालाघाट / निखिल डोंगरे: बालाघाट जिले की किरनापुर तहसील में एक बार फिर किसानों और चुनावी वादों को लेकर सियासत गरमा गई है। जिला पंचायत सदस्य एवं कांग्रेस नेत्री ज्योति ईश्वर उमरे ने प्रदेश सरकार और भाजपा नेताओं पर तीखा हमला बोलते हुए किसानों की समस्याओं, धान के समर्थन मूल्य, खाद संकट, महंगाई, शिक्षा, स्वास्थ्य और कानून-व्यवस्था को लेकर सवालों की झड़ी लगा दी।
जारी बयान में उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश के किसान भीषण उमस और बारिश के बीच खेतों में धान की रोपाई करने में जुटे हैं, जबकि सत्ता पक्ष के जनप्रतिनिधि सफेद कुर्ता-पायजामा पहनकर खेतों में फोटो और सोशल मीडिया के लिए रील्स बनाने में व्यस्त हैं। उन्होंने कहा कि चुनाव के दौरान किसानों से धान का समर्थन मूल्य ₹3100 प्रति क्विंटल और ₹900 बोनस देने का वादा किया गया था, लेकिन अब तक यह वादा पूरा नहीं हुआ।
उन्होंने कहा कि किसानों के सामने सबसे बड़ी समस्या खाद की उपलब्धता को लेकर है। सोसायटियों और गोदामों में पर्याप्त खाद नहीं होने से किसान चिंतित हैं कि रोपाई के बाद फसल में उपयोग के लिए खाद कहां से मिलेगी। उनका आरोप है कि सरकार किसानों की मूलभूत जरूरतों को पूरा करने में विफल रही है।
ज्योति उमरे ने अपने बयान में प्रदेश की कानून-व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। उन्होंने मंदिरों में चोरी की घटनाओं, पेट्रोल में कथित मिलावट, पेपर लीक मामलों तथा युवाओं के भविष्य से जुड़े मुद्दों को उठाते हुए कहा कि आम जनता कई मोर्चों पर परेशान है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि महंगाई लगातार बढ़ रही है, बिजली के बिल आम लोगों पर अतिरिक्त बोझ बन रहे हैं और गैस सिलेंडर की कीमतों ने घरेलू बजट बिगाड़ दिया है।
उन्होंने शिक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर भी सरकार को घेरा। उनके अनुसार सरकारी स्कूलों और अस्पतालों की स्थिति कमजोर होती जा रही है, जबकि निजी संस्थानों को बढ़ावा मिलने से आम लोगों पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है।
कांग्रेस नेत्री ने कहा कि जनता अब चुनावी वादों का हिसाब मांग रही है और केवल प्रचार, फोटोशूट या सोशल मीडिया गतिविधियों से किसानों और आम नागरिकों की समस्याओं का समाधान नहीं होगा। उन्होंने सरकार से किसानों को समय पर खाद उपलब्ध कराने, चुनावी वादों को पूरा करने तथा महंगाई पर नियंत्रण के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की।
हालांकि, सरकार की ओर से इन आरोपों पर तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। प्रतिक्रिया प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।

