अयोध्या। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में बड़ा प्रशासनिक बदलाव हुआ है। ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा का इस्तीफा स्वीकार किए जाने के बाद अब उनकी जिम्मेदारियां कृष्ण मोहन को सौंपी गई हैं। ट्रस्ट की बैठक में यह निर्णय लिया गया, जिसकी जानकारी ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी ने दी।
कृष्ण मोहन को फिलहाल अंतरिम महामंत्री (कार्यवाहक महासचिव) की जिम्मेदारी दी गई है। पदभार संभालने के बाद उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी पहली प्राथमिकता ट्रस्ट के कामकाज में पारदर्शिता बढ़ाना, श्रद्धालुओं का विश्वास मजबूत करना और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करना होगी।
कृष्ण मोहन ने क्या कहा ?
नई जिम्मेदारी मिलने के बाद कृष्ण मोहन ने कहा कि ट्रस्ट के संचालन और प्रबंधन में कुछ कमियां रह गई थीं, जिनका कुछ लोगों ने गलत फायदा उठाया। भविष्य में ऐसी कोई स्थिति दोबारा न बने, इसके लिए व्यवस्था को और मजबूत किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यदि हाल की घटनाओं से ट्रस्ट की छवि प्रभावित हुई है या श्रद्धालुओं के मन में किसी तरह का संदेह पैदा हुआ है, तो उसे दूर करना उनकी प्राथमिकता होगी।
उन्होंने भरोसा दिलाया कि राम जन्मभूमि में आने वाले हर दान और उसके उपयोग की जानकारी अधिक पारदर्शी तरीके से उपलब्ध कराने की दिशा में काम किया जाएगा, ताकि समाज का ट्रस्ट पर विश्वास और मजबूत हो।
कौन हैं कृष्ण मोहन?
कृष्ण मोहन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के वरिष्ठ पदाधिकारी हैं और पूर्व भारतीय वन सेवा (IFS) अधिकारी भी रह चुके हैं।
- आयु: लगभग 73 वर्ष
- मूल निवासी: हरदोई (उत्तर प्रदेश)
- वर्तमान भूमिका: पूर्वी उत्तर प्रदेश के क्षेत्र संघ चालक (RSS)
- वर्ष 2025 में उन्हें कामेश्वर चौपाल के स्थान पर श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का सदस्य बनाया गया था।
प्रशासनिक अनुभव और संगठनात्मक कार्यशैली के कारण उन्हें ट्रस्ट में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है।
क्या है राम मंदिर चढ़ावा विवाद?
राम मंदिर में चढ़ावे की गिनती और प्रबंधन को लेकर जून महीने में कथित अनियमितताओं का मामला सामने आया था। आरोपों के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया।
एसआईटी ने जांच के दौरान प्रारंभिक रिपोर्ट सरकार को सौंपने के बाद कार्रवाई करते हुए आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया। इन सभी पर आरोप है कि वे मंदिर के दानपात्रों से प्राप्त चढ़ावे की गिनती से जुड़ी प्रक्रिया में शामिल थे।
जांच एजेंसियां पूरे मामले की जांच कर रही हैं और आगे की कार्रवाई रिपोर्ट के आधार पर की जाएगी।
चंपत राय ने क्यों छोड़ा पद?
चढ़ावा प्रबंधन से जुड़े विवाद के बीच 6 जुलाई को चंपत राय ने ट्रस्ट के महासचिव पद से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद ट्रस्ट ने प्रशासनिक व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए कृष्ण मोहन को अंतरिम महासचिव की जिम्मेदारी सौंप दी।
अब सभी की नजर ट्रस्ट की आगामी बैठकों और एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट पर है, जिसके आधार पर आगे के फैसले लिए जाएंगे।

