भोपाल। मध्य प्रदेश वक्फ बोर्ड में हिंदू सदस्यों की नियुक्ति को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने राज्य सरकार के फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा कि इस मामले में वह जल्द ही सुप्रीम कोर्ट का रुख करेंगे। उनका कहना है कि वक्फ से जुड़े कई अहम मुद्दों पर पहले से ही सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई चल रही है, ऐसे में सरकार को नियुक्तियों में जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए थी।
आरिफ मसूद ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने भले ही कुछ प्रावधानों पर रोक नहीं लगाई है, लेकिन मामले का अंतिम फैसला अभी आना बाकी है। ऐसे में सरकार को अदालत के निर्णय का इंतजार करना चाहिए था। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने संशोधित प्रावधानों की भावना के अनुरूप नियुक्तियां नहीं की हैं और इस पर स्पष्ट जवाब देना चाहिए।
भोपाल में सड़क पर उतरी ऑल इंडिया मुस्लिम त्योहार कमेटी
सरकार के फैसले के विरोध में राजधानी भोपाल के बुधवारा चौराहे पर ऑल इंडिया मुस्लिम त्योहार कमेटी के पदाधिकारियों और सदस्यों ने प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने वक्फ बोर्ड में गैर-मुस्लिम सदस्यों की नियुक्ति वापस लेने की मांग की। उनका कहना था कि इस फैसले से मुस्लिम समाज की धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं।
कमेटी के संरक्षक शमशुल हसन ने कहा कि वक्फ व्यवस्था मुस्लिम समाज द्वारा धार्मिक उद्देश्य से समर्पित संपत्तियों के प्रबंधन से जुड़ी होती है। इसलिए वक्फ बोर्ड का संचालन भी उसी धार्मिक परंपरा और व्यवस्था के अनुरूप होना चाहिए।
‘वक्फ ट्रस्ट है, धार्मिक संस्था नहीं’
आरिफ मसूद ने कहा कि वक्फ को केवल धार्मिक संस्था के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि यह एक ट्रस्ट है, जिसकी व्यवस्था स्वतंत्रता के बाद कानूनी रूप से बनाई गई थी। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि जिस श्रेणी के तहत आयुक्त की नियुक्ति की गई है, उसका कानूनी आधार क्या है और सरकार को इस पर सार्वजनिक रूप से स्पष्टीकरण देना चाहिए।
उन्होंने कहा कि सरकार के फैसले से जुड़े कई संवैधानिक और कानूनी प्रश्न हैं, जिनकी न्यायिक समीक्षा आवश्यक है। इसी कारण वह इस मामले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देंगे।
विवाद के बीच बढ़ी राजनीतिक हलचल
वक्फ बोर्ड में हिंदू सदस्यों की नियुक्ति को लेकर राज्य में राजनीतिक बहस तेज हो गई है। एक ओर सरकार अपने फैसले को कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा बता रही है, वहीं विपक्ष और कुछ मुस्लिम संगठनों ने इस पर आपत्ति जताते हुए फैसले को वापस लेने की मांग की है। अब इस मामले पर सभी की निगाहें सुप्रीम कोर्ट की आगामी सुनवाई और संभावित कानूनी कार्रवाई पर टिकी हैं।

