भोपाल: दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों के आंदोलन, पुलिस कार्रवाई और कांग्रेस नेताओं की गिरफ्तारी का असर अब मध्य प्रदेश की राजनीति में साफ दिखाई देने लगा है। राजधानी भोपाल में बुधवार को सड़क से लेकर विधानसभा तक इस मुद्दे पर जबरदस्त सियासी टकराव देखने को मिला।
एक ओर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने प्रधानमंत्री आवास की ओर कांग्रेस के प्रदर्शन के विरोध में रेड क्रॉस चौराहे पर प्रदर्शन किया, वहीं दूसरी ओर कांग्रेस ने विधानसभा के भीतर और बाहर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार समेत कांग्रेस विधायक हाथों पर काली पट्टी बांधकर सदन पहुंचे और दिल्ली में छात्रों के साथ हुई कथित मारपीट तथा कांग्रेस नेताओं की गिरफ्तारी का विरोध जताया।
जानकारी अनुसार, कांग्रेस ने विधानसभा में इस मुद्दे पर स्थगन प्रस्ताव के जरिए चर्चा की मांग की, लेकिन विधानसभा अध्यक्ष ने इसकी अनुमति नहीं दी। इसके बाद विपक्ष ने जोरदार नारेबाजी शुरू कर दी, जिससे सदन का माहौल गर्मा गया। लगातार हंगामे के बीच विधानसभा की कार्यवाही 15 मिनट के लिए स्थगित करनी पड़ी। कांग्रेस ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग दोहराते हुए आरोप लगाया कि छात्रों की आवाज दबाई जा रही है, जबकि सत्ता पक्ष ने पूरे विरोध को केवल राजनीतिक नौटंकी और मीडिया में सुर्खियां बटोरने की कोशिश बताया।
भोपाल में BJP का प्रदर्शन
उधर विधानसभा के बाहर भी राजनीतिक गतिविधियां तेज रहीं। भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं ने रेड क्रॉस चौराहे पर प्रदर्शन कर कांग्रेस पर प्रधानमंत्री आवास की सुरक्षा व्यवस्था भंग करने की कोशिश का आरोप लगाया। भाजपा का कहना है कि लोकतंत्र में विरोध का अधिकार है, लेकिन संवेदनशील क्षेत्रों में प्रदर्शन कर कानून-व्यवस्था को चुनौती देना उचित नहीं है।
वहीं कांग्रेस ने ‘छात्रों की गूंज’ अभियान के तहत प्रेस कॉन्फ्रेंस कर छात्रों के मुद्दों पर सरकार को घेरने की रणनीति बनाई, जबकि समाजवादी पार्टी ने भी राहुल गांधी और अखिलेश यादव की हिरासत का मुद्दा उठाते हुए केंद्र सरकार पर लोकतांत्रिक अधिकारों के दमन का आरोप लगाया।
इसी दौरान विधानसभा के प्रश्नकाल में भी सरकार को कई अहम मुद्दों पर विपक्ष के सवालों का सामना करना पड़ा। ई-अटेंडेंस, आदिवासी भूमि, किसानों के लंबित मुआवजे, केन-बेतवा परियोजना, भोपाल सिटी लिंक की पेनल्टी, नामांतरण और चंबल सूक्ष्म सिंचाई परियोजना जैसे विषयों पर तीखी बहस हुई।
कांग्रेस विधायक बाबू जंडेल ने चंबल सिंचाई परियोजना में भ्रष्टाचार के आरोप लगाए, जबकि मंत्री कृष्णा गौर ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए परियोजना को सफल बताया। दिल्ली की घटना को लेकर चर्चा की मांग पर मंत्री राकेश सिंह ने कहा कि यह मध्य प्रदेश के अधिकार क्षेत्र का विषय नहीं है, इसलिए सदन में इस पर चर्चा नहीं हो सकती। हालांकि, इस मुद्दे ने पूरे दिन विधानसभा और प्रदेश की राजनीति का केंद्र बने रहकर सत्ता और विपक्ष के बीच तीखी राजनीतिक लड़ाई को और तेज कर दिया।

