नई दिल्ली : दिल्ली के छात्र आंदोलन और शिक्षा व्यवस्था को लेकर जारी विरोध प्रदर्शन के बीच बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में भर्ती शिक्षाविद और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा और केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह को पत्र लिखकर अनशन समाप्त करने के संकेत दिए हैं।
वांगचुक ने कहा है कि यदि सरकार छात्रों के खिलाफ किसी तरह की दंडात्मक कार्रवाई न करने का भरोसा देती है और सकारात्मक संवाद की पहल करती है, तो वह अपना अनशन समाप्त करने पर विचार कर सकते हैं। उनका कहना है कि यह आंदोलन किसी व्यक्ति के खिलाफ नहीं, बल्कि देश की शिक्षा व्यवस्था और छात्रों के भविष्य से जुड़ा है।
इधर, दिल्ली हाईकोर्ट में संसद मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों के साथ कथित मारपीट के मामले में सुनवाई हुई। अदालत ने दिल्ली सरकार और संबंधित एजेंसियों को निर्देश दिया कि घटना से जुड़े सभी CCTV फुटेज और डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित रखा जाए, ताकि जांच के दौरान कोई अहम सबूत नष्ट न हो। कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए रिकॉर्ड संरक्षित रखने पर विशेष जोर दिया।
न्यूट्रल जगह पर होगी बातचीत: CJP
उधर, कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने सरकार की बातचीत की पेशकश को मौजूदा स्वरूप में स्वीकार करने से इनकार कर दिया है। पार्टी के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास ने कहा कि आंदोलन किसी मंत्री के आवास या कार्यालय में नहीं, बल्कि जनता के बीच चल रहा है। यदि सरकार वास्तव में समाधान चाहती है, तो उसे जंतर-मंतर या किसी तटस्थ स्थान पर वार्ता करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि आंदोलनकारियों का विश्वास तभी बनेगा जब बातचीत पारदर्शी और निष्पक्ष माहौल में होगी।
इस बीच जंतर-मंतर पर प्रदर्शन लगातार 33वें दिन भी जारी रहा। बड़ी संख्या में छात्र और समर्थक प्रदर्शन स्थल पर मौजूद रहे। सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए राजधानी में कई स्थानों पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया, जबकि एहतियात के तौर पर 16 मेट्रो स्टेशनों के प्रवेश और निकास पर भी प्रतिबंध लगाए गए। आंदोलन को लेकर देशभर में राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रियाएं लगातार तेज होती जा रही हैं।

