नई दिल्ली: असम की स्टार मुक्केबाज और ओलंपिक कांस्य पदक विजेता लवलीना बोरगोहेन ने ग्लास्गो राष्ट्रमंडल खेलों में जीते अपने रजत पदक को बाढ़ से प्रभावित असम के लोगों को समर्पित कर खेल भावना के साथ सामाजिक संवेदनशीलता की भी मिसाल पेश की है। फाइनल मुकाबले में हार के बावजूद उनका यह फैसला लोगों का दिल जीत रहा है।
महिलाओं के 75 किलोग्राम भार वर्ग के स्वर्ण पदक मुकाबले में लवलीना का सामना ऑस्ट्रेलिया की एम्मा-सू ग्रीनट्री से हुआ। दोनों खिलाड़ियों के बीच मुकाबला बेहद रोमांचक रहा, लेकिन अंत में 1-4 के फैसले के साथ जीत ऑस्ट्रेलियाई मुक्केबाज के नाम रही। इस हार के बाद लवलीना को रजत पदक से संतोष करना पड़ा।
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असम बाढ़ पीड़ितों के लिए जताई चिंता
पदक जीतने के बाद लवलीना की पहली चिंता अपनी उपलब्धि नहीं, बल्कि अपने गृह राज्य असम में बाढ़ से जूझ रहे लोग रहे। उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में असम की स्थिति उन्हें बेहद दुखी कर रही है। उन्होंने कहा कि बाढ़ के दौरान लोगों को भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है, लेकिन असली चुनौतियां पानी उतरने के बाद शुरू होती हैं, जब विस्थापन, आजीविका और स्वास्थ्य जैसी समस्याएं सामने आती हैं।
लवलीना ने कहा कि असम के लोगों की पीड़ा उनके लिए व्यक्तिगत रूप से बेहद मायने रखती है। उन्होंने उम्मीद जताई कि राज्य जल्द ही इस आपदा से उबरकर सामान्य स्थिति की ओर लौटेगा। उन्होंने अपने रजत पदक को बाढ़ प्रभावित लोगों के साहस, संघर्ष और उम्मीद को समर्पित करते हुए उनके प्रति अपना समर्थन और एकजुटता व्यक्त की।

