भोपाल: राजधानी भोपाल के जल स्रोतों में प्रदूषण और पर्यावरणीय नियमों की अनदेखी को लेकर राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) की मध्यप्रदेश पीठ ने सख्त रुख अपनाया है। छोटे तालाब में रोजाना बड़ी मात्रा में सीवेज पहुंचने के मामले में NGT ने मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (MPPCB) को नगर निगम भोपाल पर पर्यावरण क्षतिपूर्ति की गणना करने और नियमानुसार कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
बाणगंगा नाले से रोज 8 से 10 MLD सीवेज
सुनवाई के दौरान सामने आया कि बाणगंगा नाले के जरिए प्रतिदिन करीब 8 से 10 एमएलडी सीवेज छोटे तालाब में पहुंच रहा है। इससे तालाब के पानी की गुणवत्ता और जलीय पर्यावरण पर गंभीर असर पड़ने की आशंका है।
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NGT ने मामले को गंभीरता से लेते हुए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को सीवेज के स्रोत और उससे होने वाले पर्यावरणीय नुकसान का आकलन करने के निर्देश दिए हैं। नगर निगम की जिम्मेदारी तय होने पर पर्यावरण क्षतिपूर्ति भी लगाई जा सकती है।
पेड़ों में ड्रिल कर केमिकल डालने का आरोप
छोटे तालाब क्षेत्र में पेड़ों को नुकसान पहुंचाने का मामला भी सुनवाई के दौरान सामने आया। आरोप है कि कुछ पेड़ों के तनों में ड्रिल कर संदिग्ध केमिकल डाला गया। NGT ने इस मामले को गंभीर मानते हुए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ प्रशासनिक और कानूनी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
शाहपुरा झील से कलियासोत डैम तक होगी जांच
सुनवाई में शाहपुरा झील से कलियासोत डैम तक प्राकृतिक नाले में कथित अवैध निर्माण, खुदाई और मिट्टी भरने का मामला भी उठा। इस पर NGT ने चार विभागों की संयुक्त जांच समिति गठित करने के निर्देश दिए हैं।
समिति पूरे क्षेत्र का स्थल निरीक्षण कर निर्माण और अन्य गतिविधियों की जांच करेगी। उसे चार सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट NGT के समक्ष पेश करनी होगी।
जल स्रोतों के संरक्षण पर बढ़ा दबाव
NGT की सख्ती के बाद अब नगर निगम और संबंधित विभागों पर भोपाल के जल स्रोतों को प्रदूषण से बचाने के लिए ठोस कदम उठाने का दबाव बढ़ गया है। सीवेज की रोकथाम, नालों की ट्रैपिंग और प्राकृतिक जलधाराओं को अतिक्रमण से बचाने की दिशा में कार्रवाई की उम्मीद है।

