इंदौर: इंदौर पुलिस में एक जैसे ‘पॉकेट गवाहों’ के जरिए करीब 2000 केस दर्ज किए जाने के मामले में पुलिस कमिश्नर ने बड़ा एक्शन लिया है। जांच और कोर्ट की सख्ती के बाद चार पुलिस अधिकारियों पर कार्रवाई की गई है। इनमें एक टीआई को थाने से हटा दिया गया, जबकि दो टीआई को डिमोट कर एसआई बनाया गया है। एक अन्य अधिकारी पर भी पदावनति की कार्रवाई हुई है।
खजराना में 700 केस, दो ही गवाह
खजराना थाने के पूर्व टीआई दिनेश वर्मा के कार्यकाल में जुआ, सट्टा और आर्म्स एक्ट के करीब 700 मामलों में इरशाद और नवीन नाम के दो गवाहों का बार-बार इस्तेमाल हुआ। विभागीय जांच में आरोप सिद्ध होने के बाद उन्हें टीआई से एसआई पद पर डिमोट कर दिया गया। वर्मा इस फैसले के खिलाफ अपील और हाईकोर्ट जाने की तैयारी में हैं।
चंदन नगर टीआई को हटाया
चंदन नगर थाने में करीब 1350 मामलों में चार गवाहों—अमीन रंगरेज, सलमान, अब्दुल और माजिद—के नाम बार-बार सामने आए। मामले में सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी को कोर्ट में पेश होना पड़ा। इसके बाद टीआई इंद्रमणि पटेल को थाने से हटा दिया गया। उनकी विभागीय जांच जारी है और डीएसपी प्रमोशन में भी उनका नाम रोक दिया गया है।
एमआईजी में टीआई और जांच अधिकारी पर कार्रवाई
2022 के एक मामले में समय पर एफआईआर दर्ज नहीं करने और बाद में शिकायतकर्ता युवती पर ही केस दर्ज करने के मामले में एमआईजी के पूर्व टीआई अजय वर्मा को डिमोट कर एसआई बनाया गया है। जांच अधिकारी धीरज शर्मा को भी एएसआई से आरक्षक बनाया गया। अजय वर्मा का मामला हाईकोर्ट में लंबित है।
विजयनगर टीआई को डिमोट कर एसआई बनाया
वर्ष 2024 में नाबालिगों को सट्टे के फर्जी मामलों में फंसाने के आरोप सिद्ध होने के बाद विजयनगर के पूर्व टीआई रवींद्र गुर्जर को भी डिमोट कर एसआई बनाया गया। डिमोशन के बाद से उन्होंने करीब डेढ़ साल से ड्यूटी जॉइन नहीं की है। मामला फिलहाल हाईकोर्ट की डबल बेंच में लंबित है।

