नई दिल्ली: केंद्र सरकार मौजूदा E20 पेट्रोल के साथ पुराने वाहनों के लिए E10 पेट्रोल उपलब्ध कराने के विकल्प पर विचार कर रही है। मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंत नागेश्वरन के सुझाव के बाद सरकार ने इस मुद्दे पर तेल कंपनियों के साथ बातचीत शुरू की है। हालांकि, यह प्रक्रिया अभी शुरुआती चरण में है और E10 को दोबारा बाजार में उतारने को लेकर कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है।
सरकार का फोकस खास तौर पर उन पुराने वाहनों पर है, जिन्हें E20 यानी 20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल के हिसाब से डिजाइन नहीं किया गया है।
E20 के बाद पुराने वाहन मालिकों की बढ़ी चिंता
भारत ने पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रण का लक्ष्य तय समय से करीब पांच साल पहले हासिल कर लिया था। इसके बाद E20 पेट्रोल को प्रमुख ईंधन विकल्प के रूप में बढ़ावा दिया गया।
हालांकि, पुराने वाहन मालिकों की ओर से लगातार यह चिंता जताई जाती रही है कि E20 के लिए डिजाइन नहीं किए गए वाहनों में माइलेज प्रभावित हो सकता है और लंबे समय में इंजन से जुड़ी समस्याएं सामने आ सकती हैं। इसी वजह से पुराने वाहनों के लिए E10 को वैकल्पिक ईंधन के तौर पर उपलब्ध कराने की मांग उठती रही है।
E10 और E20 दोनों उपलब्ध कराने में क्या चुनौती?
सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती ईंधन की आपूर्ति और वितरण व्यवस्था को लेकर है। अगर E10 और E20 दोनों पेट्रोल बाजार में उपलब्ध कराए जाते हैं, तो पेट्रोल पंपों पर अलग-अलग ईंधन के लिए अतिरिक्त भंडारण व्यवस्था की जरूरत होगी।
इसके अलावा, ईंधन के परिवहन और वितरण के लिए भी अलग व्यवस्था करनी पड़ सकती है। सरकार पहले ही देशभर में पेट्रोल के अलग-अलग ग्रेड उपलब्ध कराने को महंगा और जटिल प्रक्रिया बता चुकी है। ऐसे में E10 की वापसी केवल उत्पादन का नहीं, बल्कि पूरी सप्लाई चेन का मुद्दा है।
क्या पुराने वाहनों को E10 से फायदा होगा?
अधिकारियों की ओर से पुराने और कम इथेनॉल-अनुकूल वाहनों को लेकर उठ रही चिंताओं पर भी विचार किया गया है। माना जा रहा है कि कम इथेनॉल मिश्रण वाला E10 पेट्रोल पुराने वाहनों के लिए बेहतर विकल्प हो सकता है।
हालांकि, सरकार अभी इस विकल्प पर विचार कर रही है कि E10 को देशभर में उपलब्ध कराया जाए या फिर इसे कुछ चुनिंदा क्षेत्रों में सीमित विकल्प के तौर पर रखा जाए।
क्या E10 की वापसी का फैसला हो चुका है?
नहीं, सरकार ने अभी E10 पेट्रोल को दोबारा लागू करने का कोई अंतिम फैसला नहीं लिया है। फिलहाल इस मुद्दे पर समीक्षा और तेल कंपनियों के साथ बातचीत चल रही है।
इससे पहले भी सरकार ने देशभर में पेट्रोल के अलग-अलग ग्रेड उपलब्ध कराने में आने वाली लागत और लॉजिस्टिक चुनौतियों का जिक्र किया था। अब पुराने वाहनों के मालिकों की चिंताओं और मुख्य आर्थिक सलाहकार के सुझाव के बाद E10 को दोबारा विकल्प के तौर पर उपलब्ध कराने की संभावना पर विचार किया जा रहा है।

