देवास: देवास में डिजिटल अरेस्ट के नाम पर एक रिटायर्ड फैक्ट्री कर्मचारी से करीब 63 लाख रुपए की ठगी का मामला सामने आया है। आरोप है कि साइबर ठगों ने सुरेश इंग्ले को पुलिस और जांच एजेंसियों के नाम पर डराया और डिजिटल अरेस्ट की धमकी देकर अलग-अलग खातों में रकम ट्रांसफर कराई।
शिकायत मिलने के बाद देवास सिटी कोतवाली पुलिस ने कार्रवाई करते हुए 12 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनमें से 11 आरोपियों को जेल भेज दिया गया है, जबकि पश्चिम बंगाल निवासी आरोपी कमलकान्ति से पुलिस की पूछताछ जारी है।
ठगी की रकम में से 54.84 लाख रुपए बरामद
पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से ठगी की रकम में से 54 लाख 84 हजार रुपए नकद बरामद किए हैं। पुलिस अब आरोपियों से ठगी के नेटवर्क और रकम के लेन-देन से जुड़ी अन्य जानकारियां जुटा रही है।
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127 दिन तक चला पुलिस का ऑपरेशन
देवास पुलिस ने आरोपियों तक पहुंचने के लिए 127 दिनों तक लगातार जांच की। इस दौरान 70 पुलिसकर्मियों की 19 टीमों को अलग-अलग स्थानों पर भेजा गया।
पुलिस टीमों ने करीब 58 हजार 315 किलोमीटर की दूरी तय कर 17 राज्यों के 33 जिलों में दबिश दी। राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र, कर्नाटक, दिल्ली और बिहार समेत कई राज्यों में कार्रवाई करते हुए संदिग्धों को पकड़ा गया।
एसपी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में किया खुलासा
पूरे मामले का खुलासा देवास पुलिस अधीक्षक पुनीत गेहलोत ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान किया। पुलिस के मुताबिक, आरोपियों ने डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाकर रिटायर्ड कर्मचारी को अपने जाल में फंसाया और उससे लाखों रुपए की ठगी की।
पुलिस ने लोगों से की सावधान रहने की अपील
देवास पुलिस ने लोगों को साइबर ठगी से सावधान रहने की अपील की है। पुलिस ने स्पष्ट किया कि ‘डिजिटल अरेस्ट’ नाम की कोई कानूनी प्रक्रिया नहीं होती।

