भोपाल। मध्य प्रदेश में मानसून अब धीरे-धीरे विदाई की ओर बढ़ रहा है, लेकिन जाते-जाते एक बार फिर बारिश का दौर प्रदेश को भिगो सकता है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक फिलहाल 20 सितंबर तक प्रदेश में किसी बड़े बारिश सिस्टम का असर नहीं दिख रहा है, जबकि 21 सितंबर के बाद मौसम में बदलाव की संभावना बन रही है। इस दौरान चक्रवाती परिसंचरण और कम दबाव के क्षेत्र जैसी मौसमी गतिविधियां सक्रिय होने पर प्रदेश के कुछ हिस्सों में बारिश की गतिविधियां फिर बढ़ सकती हैं।
20 सितंबर तक बड़े अलर्ट से राहत
फिलहाल प्रदेश में अगले कुछ दिनों के लिए भारी या अति भारी बारिश का कोई बड़ा अलर्ट नहीं है। मौसम में स्थानीय स्तर पर बनने वाले सिस्टम के कारण कहीं-कहीं गरज-चमक के साथ बारिश हो सकती है, लेकिन व्यापक स्तर पर तेज बारिश की गतिविधि कमजोर रहने के आसार हैं।
IMD के उपलब्ध पूर्वानुमान में मध्य प्रदेश के पश्चिमी और पूर्वी दोनों हिस्सों में 20 सितंबर तक गरज-चमक और आंधी जैसी मौसमी गतिविधियों की संभावना दर्ज की गई थी। इसके बाद गतिविधियों में बदलाव देखने को मिल सकता है।
21 सितंबर के बाद फिर बदल सकता है मौसम
मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक 21 सितंबर के बाद बंगाल की खाड़ी और आसपास बनने वाली मौसमी प्रणालियों का प्रभाव मध्य भारत तक पहुंच सकता है। कम दबाव का क्षेत्र या चक्रवाती परिसंचरण मजबूत होने की स्थिति में मध्य प्रदेश के कुछ हिस्सों में बारिश का नया दौर बन सकता है।
हालांकि, सितंबर के अंतिम सप्ताह में बनने वाली किसी भी प्रणाली की तीव्रता और उसका रास्ता आने वाले दिनों में ही अधिक स्पष्ट होगा। इसलिए फिलहाल 21 सितंबर के बाद बारिश की गतिविधि बढ़ने की संभावना को लेकर नजर बनी हुई है।
मानसून की विदाई एक प्रक्रिया, कोई एक तारीख नहीं
मध्य प्रदेश में मानसून की गतिविधियां सितंबर के अंतिम चरण में सामान्य रूप से कमजोर होने लगती हैं, लेकिन मानसून की विदाई को केवल 30 सितंबर की तारीख से तय नहीं किया जाता। IMD के अनुसार मानसून की वापसी के लिए लगातार करीब पांच दिनों तक बारिश की गतिविधि में कमी, निचले क्षोभमंडल में एंटी-साइक्लोन की स्थापना और वातावरण में नमी में उल्लेखनीय कमी जैसे मानकों को देखा जाता है।
यानी सितंबर के आखिरी सप्ताह में बारिश होने के बावजूद मानसून की समग्र विदाई प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है। दूसरी ओर, किसी सक्रिय मौसम प्रणाली के कारण कुछ इलाकों में बारिश का दौर जारी भी रह सकता है।
88 फीसदी से ज्यादा बारिश, फिर भी कई जिले पीछे
प्रदेश में इस मानसून सीजन में अब तक बारिश का आंकड़ा सामान्य के आसपास पहुंच चुका है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार मध्य प्रदेश में सीजन की सामान्य बारिश के मुकाबले करीब 88 फीसदी से अधिक बारिश दर्ज की गई है, लेकिन कई जिलों में अभी भी बारिश की कमी बनी हुई है।
पूर्वी मध्य प्रदेश के जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग के कई इलाकों में बारिश का आंकड़ा सामान्य से नीचे रहा है। बालाघाट, छिंदवाड़ा, डिंडोरी, दमोह, जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर, पांढुर्णा, मंडला, रीवा, सागर और सिवनी जैसे जिलों में भी बारिश की कमी दर्ज की गई है।
पिछले दिनों हुई तेज बारिश से पूर्वी हिस्से के कई जिलों में बारिश के आंकड़ों में सुधार हुआ था। कुछ क्षेत्रों में अत्यधिक बारिश के कारण नदी-नालों के जलस्तर में वृद्धि और बाढ़ जैसी स्थिति भी बनी थी। इसके बावजूद मानसून सीजन के कुल आंकड़े में कई जिलों की कमी अभी पूरी तरह दूर नहीं हुई है।
पश्चिमी मध्य प्रदेश के कई जिले भी कम बारिश की चपेट में
पश्चिमी मध्य प्रदेश के कई जिलों में भी सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई है। इनमें आलीराजपुर, अशोकनगर, बैतूल, देवास, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, खंडवा, मंदसौर, मुरैना, नर्मदापुरम, नीमच, बड़वानी, रायसेन, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, उज्जैन और विदिशा शामिल हैं।
इन जिलों के लिए सितंबर के आखिरी दौर की बारिश महत्वपूर्ण हो सकती है। यदि 21 सितंबर के बाद बनने वाली मौसमी प्रणालियां सक्रिय होती हैं और इन क्षेत्रों में अच्छी बारिश होती है तो सीजन की बारिश के आंकड़े में और सुधार संभव है।
इन जिलों में सामान्य से ज्यादा बारिश
प्रदेश के कई जिलों में मानसून सामान्य से अधिक बारिश दे चुका है। इनमें अनूपपुर, छतरपुर, मैहर, मऊगंज, निवाड़ी, पन्ना, सतना, शहडोल, सीधी, सिंगरौली, टीकमगढ़, उमरिया, आगर-मालवा, भिंड, भोपाल, बुरहानपुर, दतिया, गुना, ग्वालियर, खरगोन, राजगढ़, श्योपुर और शिवपुरी शामिल हैं।
इस तरह प्रदेश में बारिश का वितरण एक समान नहीं रहा है। कुछ जिलों में सामान्य से काफी अधिक बारिश हुई, जबकि कई जिले अब भी बारिश की कमी से जूझ रहे हैं।
किसानों के लिए आखिरी दौर की बारिश अहम
मानसून की विदाई से पहले होने वाली बारिश किसानों के लिए भी महत्वपूर्ण हो सकती है। जिन इलाकों में बारिश सामान्य से कम रही है, वहां सितंबर के अंतिम दौर की बारिश से मिट्टी में नमी बढ़ सकती है और जलस्रोतों को भी कुछ राहत मिल सकती है।
हालांकि, यदि बारिश बहुत कम समय में अत्यधिक मात्रा में होती है तो इसका फायदा सीमित होकर नुकसान का खतरा भी बढ़ सकता है। इसलिए सितंबर के आखिरी सप्ताह में बनने वाली मौसम प्रणालियों की तीव्रता और बारिश के वितरण पर नजर रखना जरूरी होगा।
अभी राहत, आगे फिर मौसम की करवट
कुल मिलाकर मध्य प्रदेश में अगले कुछ दिनों में भारी बारिश से राहत की स्थिति बनी हुई है। 20 सितंबर तक बड़े सिस्टम का प्रभाव सीमित रहने की संभावना है, जबकि इसके बाद मौसम एक बार फिर करवट ले सकता है।
अब निगाहें सितंबर के आखिरी सप्ताह में बनने वाली मौसमी प्रणालियों पर रहेंगी। यदि कम दबाव का क्षेत्र या चक्रवाती परिसंचरण मजबूत होता है, तो प्रदेश के कुछ हिस्सों में मानसून की विदाई से पहले बारिश का एक और दौर देखने को मिल सकता है।

