भोपाल: संदिग्ध फर्जी पासपोर्ट मामले की जांच अब दस्तावेज तैयार करने वाले आरोपियों के साथ-साथ पुलिस वेरिफिकेशन प्रक्रिया तक पहुंच गई है। मध्यप्रदेश एसटीएफ अन्ना नगर स्थित एक मठ के पते पर बने करीब 40 पासपोर्ट की जांच कर रही है। इनमें कुछ पासपोर्ट धारकों के विदेश यात्रा करने के रिकॉर्ड भी सामने आए हैं।
एसटीएफ करीब 70 पासपोर्ट की जांच कर रही है। इनमें बड़ी संख्या में पासपोर्ट वर्ष 2021-22 में जारी किए गए थे। जांच टीम पासपोर्ट धारकों के वास्तविक पते, पहचान और आवेदन में लगाए गए दस्तावेजों का मिलान कर रही है। इसके लिए मध्यप्रदेश के अलावा असम और अन्य स्थानों पर भी टीमें भेजी गई हैं।
पुलिस वेरिफिकेशन की प्रक्रिया पर सवाल
जांच में यह भी देखा जा रहा है कि पासपोर्ट आवेदकों के पते और पहचान का पुलिस वेरिफिकेशन किस आधार पर किया गया। एसटीएफ यह पता लगा रही है कि संबंधित पुलिसकर्मी वास्तव में बताए गए पते पर पहुंचे थे या दस्तावेजों के आधार पर ही सत्यापन कर दिया गया।
अधिकारियों को शुरुआती जांच में वेरिफिकेशन प्रक्रिया में गड़बड़ी के संकेत मिले हैं। अब संबंधित पुलिसकर्मियों की भूमिका और वेरिफिकेशन रिकॉर्ड की जांच की जा रही है।
सरकारी रिकॉर्ड और दस्तावेजों की भी जांच
एसटीएफ यह भी पता लगा रही है कि फर्जी पते और पहचान से जुड़े दस्तावेज तैयार कराने में नगर निकाय या अन्य सरकारी कर्मचारियों की कोई भूमिका थी या नहीं। यदि सरकारी रिकॉर्ड या प्रमाण-पत्रों का इस्तेमाल पासपोर्ट बनवाने में किया गया है तो उसकी प्रक्रिया और संबंधित लोगों की भूमिका की जांच की जाएगी।
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कंबोडिया, स्पेन समेत कई देशों की यात्रा के रिकॉर्ड
मामले की जांच में कुछ पासपोर्ट धारकों के कंबोडिया, स्पेन, थाईलैंड और इंडोनेशिया जाने के रिकॉर्ड भी मिले हैं। एसटीएफ अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इन पासपोर्ट का इस्तेमाल केवल भारतीय पहचान हासिल करने के लिए किया गया था या इनके जरिए किसी बड़े अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क को भी मदद मिली।
एसटीएफ ने फर्जी दस्तावेजों के जरिए भारतीय पता और पहचान तैयार कर पासपोर्ट बनवाने वाले नेटवर्क के खिलाफ मामला दर्ज किया है। मामले में अब तक दो आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है। जांच आगे बढ़ने पर करीब 100 लोगों की गिरफ्तारी की संभावना जताई जा रही है।

