ग्वालियर: सिंधिया राजघराने की करीब 41 हजार करोड़ रुपये की संपत्ति के बंटवारे से जुड़े विवाद में गुरुवार को नया मोड़ आया। ग्वालियर कोर्ट ने केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया की बड़ी बुआ की बेटी प्रतिमा देवी की ओर से दाखिल आपत्ति स्वीकार कर ली। इसके साथ ही अब संपत्ति के बंटवारे से जुड़े मामले में प्रतिमा देवी का पक्ष भी सुना जाएगा।
प्रतिमा देवी ने आपत्ति दाखिल कर कहा था कि उन्हें संपत्ति बंटवारे से जुड़ी प्रक्रिया में शामिल नहीं किया गया और उन्हें भेजे गए नोटिस गलत पते पर पहुंचे थे। उन्होंने अपनी मां पद्माराजे राणा के आधार पर संपत्ति में अपने अधिकार का दावा किया है।
आउट ऑफ कोर्ट समझौते से बाहर रखा गया था
सिंधिया परिवार की संपत्ति के बंटवारे को लेकर कोर्ट की सलाह पर परिवार के सदस्यों के बीच आपसी सहमति से समझौते की प्रक्रिया चल रही है। इसमें ज्योतिरादित्य सिंधिया और उनकी तीन बुआ उषा राजे, वसुंधरा राजे और यशोधरा राजे सिंधिया के दावे शामिल हैं।
प्रतिमा देवी की आपत्ति के मुताबिक, उनकी मां पद्माराजे राणा को समझौते की प्रक्रिया में शामिल नहीं किया गया था। उन्हें ‘एक्स पार्टी’ मानते हुए बंटवारे से बाहर रखा गया था। इसी के खिलाफ प्रतिमा देवी ने ग्वालियर कोर्ट में आवेदन दिया था।
मां के हिस्से के आधार पर किया दावा
25 अगस्त की सुनवाई में प्रतिमा देवी अपनी बेटी शिवांगी और दामाद प्रतीक कारकी के साथ कोर्ट पहुंची थीं। उन्होंने कोर्ट में अपना पक्ष रखते हुए कहा था कि उनकी मां पद्माराजे राणा भी महाराजा जीवाजी राव सिंधिया की बेटी थीं। ऐसे में संपत्ति में उनकी मां के अधिकार के आधार पर उनका भी दावा बनता है।
प्रतिमा देवी की आपत्ति पर सिंधिया परिवार की ओर से जवाब भी कोर्ट में पेश किए जा चुके हैं।
अब मुख्य सुनवाई में रखा जाएगा पक्ष
गुरुवार को आपत्ति पर सुनवाई के दौरान प्रतिमा देवी की ओर से उनके दामाद प्रतीक कारकी कोर्ट पहुंचे। उन्होंने बताया कि कोर्ट ने आपत्ति स्वीकार कर ली है। इसका मतलब है कि अब प्रतिमा देवी के दावे और उनसे जुड़े दस्तावेजों पर मुख्य सुनवाई के दौरान विचार किया जाएगा।
प्रतीक कारकी ने कहा कि उन्हें कोर्ट के न्याय पर पूरा भरोसा है।
अगली सुनवाई 7 अक्टूबर को
सिंधिया परिवार के वकील प्रशांत शर्मा के मुताबिक, कोर्ट ने प्रतिमा देवी की आपत्ति को स्वीकार करते हुए मुख्य सुनवाई में शामिल कर लिया है। अब 7 अक्टूबर को मामले की अगली सुनवाई होगी। इसमें प्रतिमा देवी की आपत्ति और आपसी समझौते से जुड़े दस्तावेजों पर सुनवाई हो सकती है।

