बालाघाट: पत्रकारों ने सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसरो के खिलाफ नाराजगी जताई है। ये इन्फ्लुएंसर भोपाल से भेजे गए थे। पत्रकारों का आरोप है कि इन इन्फ्लुएंसरो ने बालाघाट और यहां की पत्रकारिता की छवि खराब की है। दरअसल, जिले के आदिवासी इलाकों में 35 बच्चों की मौत और लगातार बच्चों के बीमार होने की खबरें आ रही थीं। प्रशासन इसे नियंत्रण में बता रहा था, जबकि जमीनी हकीकत अलग थी। स्थानीय पत्रकारों ने यही हकीकत दिखाई। इसके बाद ग्रामीण इलाकों में सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसरो को भेजा गया।
अभिजीत दीपके के साथ गलत व्यवहार
शनिवार को इन इन्फ्लुएंसरो ने सीजेपी के फाउंडर अभिजीत दीपके के साथ गलत व्यवहार किया। इसके विरोध में रविवार को बालाघाट के पत्रकार एकजुट हुए। उन्होंने इन्फ्लुएंसरो के व्यवहार की कड़ी आलोचना की। इस बैठक में जिले के वरिष्ठ पत्रकार आनंद ताम्रकर, अशोक मोटवानी, रफी अंसारी, शशांक माहुले, रूपेश श्रीवास्तव और आशीष शर्मा मौजूद थे। इनके साथ ही जनसंपर्क अधिकारी माथन सिंह उईके और जिला जनसंपर्क अधिकारी अनिल पटले भी शामिल हुए।
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बैठक में शामिल हुए जिले के पत्रकार।
सरकार अपनी छवि चमकाने पर बुलाएं पत्रकारों ने जनसंपर्क अधिकारियों को चेताया कि अगर सरकार को अपनी छवि चमकाने के लिए बाहर से इन्फ्लुएंसरो को बुलाना पड़ रहा है, तो वे ऐसा करें। लेकिन, उनके जरिए बालाघाट और यहां के पत्रकारों की छवि खराब न की जाए।
माफी मांगें नहीं तो तो सरकारी खबरों को बहिष्कार होगा
पत्रकारों ने साफ कहा कि अगर शासन या प्रशासन पत्रकारों को आपस में लड़ाने की कोशिश करेगा, तो यह बालाघाट में नहीं चलेगा। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर बालाघाट के पत्रकारों की छवि खराब करने के इस काम के लिए माफी नहीं मांगी जाती है, तो वे सरकारी खबरों का बहिष्कार करेंगे।

