नई दिल्ली: भोपाल के रहवासी इलाकों में चल रहे व्यावसायिक प्रतिष्ठानों की सीलिंग से जुड़े मामले में मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई टल गई। मामला जस्टिस अमानुल्लाह और जस्टिस आर. महादेवन की डिवीजन बेंच के सामने सूचीबद्ध था। कोर्ट नंबर-7 की बेंच स्थगित होने के कारण मामले पर सुनवाई नहीं हो सकी। अगली सुनवाई की तारीख अभी तय नहीं हुई है।
इस मामले पर भोपाल के व्यापारियों और रहवासियों दोनों की नजर थी। शहर के आवासीय क्षेत्रों में करीब 62,500 व्यावसायिक प्रतिष्ठान संचालित होने की बात सामने आई है। नगर निगम अपनी अब तक की कार्रवाई से जुड़ी रिपोर्ट कोर्ट में पेश कर चुका है। सीलिंग और नोटिस से संबंधित रिकॉर्ड भी मामले का अहम हिस्सा है।
8,084 प्रतिष्ठानों को नोटिस, 190 पर हुई कार्रवाई
5 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भोपाल नगर निगम ने आवासीय क्षेत्रों में व्यावसायिक गतिविधियां संचालित करने वाले प्रतिष्ठानों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की थी। करीब 15 दिनों तक नोटिस जारी किए गए। सूची में शामिल करीब 62,500 प्रतिष्ठानों में से 8,084 प्रतिष्ठानों को नोटिस दिए गए। इसके बाद तीन दिनों तक चली कार्रवाई में करीब 190 प्रतिष्ठानों को बंद कराया गया।
सीलिंग के खिलाफ सड़क पर उतरे थे व्यापारी
नगर निगम की कार्रवाई के खिलाफ भोपाल के व्यापारी सड़कों पर उतर आए थे। व्यापारियों का कहना है कि अचानक प्रतिष्ठान बंद करने से उनकी रोजी-रोटी प्रभावित हो रही है। कई परिवारों की आय इन्हीं दुकानों और व्यवसायों पर निर्भर है।
त्योहारी सीजन नजदीक होने के कारण व्यापारियों की चिंता और बढ़ गई है। उनकी मांग है कि सीधे सीलिंग करने के बजाय सरकार और प्रशासन पहले कोई व्यावहारिक समाधान निकालें।
रहवासियों ने निगम की कार्रवाई पर उठाए सवाल
दूसरी तरफ रहवासी नगर निगम की कार्रवाई से संतुष्ट नहीं हैं। उन्होंने अधिकारियों पर पक्षपात करने का आरोप लगाया है। याचिकाकर्ता विवेक त्रिपाठी ने नगर निगम की Action Taken Report पर भी आपत्ति जताई है।
उनका आरोप है कि निगम की कार्रवाई केवल दिखावे तक सीमित रही। सुप्रीम कोर्ट में पेश दस्तावेजों में दावा किया गया है कि जिन प्रतिष्ठानों को सील किया गया था, उनमें से कुछ दोबारा खुल गए।
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क्या था सुप्रीम कोर्ट का आदेश?
भोपाल में आवासीय भवनों के व्यावसायिक उपयोग और अवैध निर्माण से जुड़ा विवाद पहले भी सुप्रीम कोर्ट पहुंच चुका है। अगस्त के पहले सप्ताह में हुई सुनवाई के दौरान कोर्ट ने मध्य प्रदेश सरकार की बनाई 10 सदस्यीय जांच समिति की कार्रवाई पर रोक लगा दी थी।
इसके साथ ही मध्य प्रदेश हाईकोर्ट से दुकान संचालकों को मिले स्टे ऑर्डर भी रद्द कर दिए गए थे। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि उसके निर्देश पर चल रही प्रक्रिया में हस्तक्षेप स्वीकार नहीं किया जाएगा। इसके बाद नगर निगम को अपनी कार्रवाई की रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए गए थे।
रहवासी चाहते हैं कमर्शियल गतिविधियां हों बंद
रहवासियों की मांग है कि आवासीय इलाकों में चल रही कमर्शियल गतिविधियों को पूरी तरह बंद किया जाए। उनका कहना है कि इन गतिविधियों के कारण कॉलोनियों में ट्रैफिक, भीड़ और शोर बढ़ रहा है, जिससे रहवासियों को परेशानी होती है। इसके अलावा सुरक्षा और स्कूली बच्चों की आवाजाही को लेकर भी चिंता जताई गई है।
व्यापारी चाहते हैं Mixed Land Use का प्रावधान
व्यापारियों की मांग रहवासियों से अलग है। वे चाहते हैं कि भोपाल का नया Master Plan जल्द लागू किया जाए और आवासीय क्षेत्रों में Mixed Land Use का प्रावधान किया जाए। इसके साथ ही व्यापारी गुजरात की तर्ज पर अनधिकृत विकास नियमितीकरण कानून-2022 जैसा प्रावधान मध्य प्रदेश में लागू करने की मांग कर रहे हैं।

