भोपाल: जनवरी 2027 में होने वाली ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट (GIS) से पहले मुख्यमंत्री निवास परिसर में बन रहा जन-मन सभागार तैयार किया जाएगा। 26.57 करोड़ रुपये की लागत से बन रहे इस सभागार का निर्माण मध्यप्रदेश भवन विकास निगम कर रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि इसका काम समिट से पहले हर हाल में पूरा हो।
मुख्यमंत्री ने सोमवार को मंत्रालय में भवन विकास निगम के संचालक मंडल की पांचवीं बैठक में निगम की मौजूदा परियोजनाओं और आगामी कार्ययोजना की समीक्षा की। यह सभागार समाज के अलग-अलग वर्गों के साथ संवाद और बैठकों के लिए उपयोग किया जाएगा।
निगम के लिए बनेगी नई रेवेन्यू बॉडी
बैठक में भवन विकास निगम की आय बढ़ाने के लिए अलग राजस्व जुटाने वाली संस्था बनाने के प्रस्ताव को सैद्धांतिक मंजूरी दी गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि निगम के पास निर्माण कार्यों के अलावा आय के नए और वैकल्पिक स्रोत भी होने चाहिए। इसके जरिए निगम के संसाधनों से अतिरिक्त राजस्व जुटाने की व्यवस्था विकसित की जाएगी।
763 परियोजनाएं, 10,994 करोड़ रुपये की लागत
अधिकारियों ने बताया कि लोक निर्माण विभाग ने भवन विकास निगम को 763 परियोजनाएं सौंपी हैं। इन सक्रिय परियोजनाओं की कुल अनुमानित निर्माण लागत 10,994 करोड़ रुपये है। मुख्यमंत्री ने बड़े भवनों की परियोजनाओं को तय समयसीमा में पूरा करने के साथ संभव होने पर समय से पहले पूरा करने के निर्देश दिए।
पांच मेडिकल कॉलेजों का निर्माण निगम के जिम्मे
भवन विकास निगम प्रदेश में पांच मेडिकल कॉलेजों की इमारतों और अन्य अधोसंरचना का निर्माण कर रहा है। इनमें उज्जैन मेडिसिटी, सिंगरौली, मंडला, रीवा और बुदनी (सीहोर) शामिल हैं। उज्जैन में संयुक्त प्रशासनिक भवन भी बनाया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने इन परियोजनाओं को समय पर पूरा करने के निर्देश दिए। नए मेडिकल कॉलेजों की भवन परियोजनाओं को केंद्र सरकार की वायबिलिटी गैप फंडिंग (VGF) के मानकों के अनुरूप तैयार करने को भी कहा गया।
भोपाल में 150 कमरों का नया स्टेट गेस्ट हाउस
भोपाल में 130 करोड़ रुपये की लागत से 150 कमरों वाला नया स्टेट गेस्ट हाउस बनाया जा रहा है। जबलपुर में 65 करोड़ रुपये की लागत से 75 कमरों का सर्किट हाउस भी तैयार किया जा रहा है। इन परियोजनाओं से बड़े आयोजनों और आधिकारिक मेहमानों के लिए सुविधाओं का विस्तार होगा।
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ठेकेदारों के भुगतान में तेजी
बैठक में बताया गया कि निर्माण कार्य पूरा होने के बाद ठेकेदारों के भुगतान का औसत समय 33 दिन से घटकर 11 दिन रह गया है। निगम में भर्ती आईआईएम इंदौर के माध्यम से की जा रही है। साथ ही मानक निविदा दस्तावेज तैयार किए जा रहे हैं, ताकि निविदा प्रक्रिया में एकरूपता बढ़ाई जा सके।

