भोपाल: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश बिजली की कमी वाले राज्य से आगे बढ़कर बिजली सरप्लस राज्य बना है। प्रदेश अपनी जरूरत के साथ देश की ऊर्जा आवश्यकता पूरी करने की क्षमता रखता है। प्रदेश की 32 हजार मेगावाट ऊर्जा क्षमता में करीब 30 प्रतिशत हिस्सा क्लीन एनर्जी का है। मुख्यमंत्री ने भोपाल में ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोसिएशन कॉन्फ्रेंस के शुभारंभ पर यह बात कही।
सस्ती और भरोसेमंद बिजली पर मंथन
नवकरणीय ऊर्जा और ऊर्जा भंडारण की किफायती खरीद पर आयोजित सम्मेलन में विद्युत वितरण कंपनियों के प्रतिनिधि और ऊर्जा विशेषज्ञ शामिल हुए। मुख्यमंत्री ने कहा कि साझा मंच ऊर्जा क्षेत्र की चुनौतियों के समाधान में मदद करेगा। उन्होंने ‘सैलियंट पावर स्टैटिस्टिक्स वर्ष 2024-25 से 2025-26’ पुस्तक का विमोचन किया।
नवकरणीय ऊर्जा में नए रिकॉर्ड
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार उपभोक्ताओं को सस्ती बिजली देने के साथ उत्पादन और व्यवस्था मजबूत करने पर ध्यान दे रही है। नई तकनीक और इकाइयों के जरिए बिजली क्षमता बढ़ाई जा रही है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश नवकरणीय ऊर्जा उत्पादन के क्षेत्र में अपने रिकॉर्ड तोड़ रहा है।
नीमच-मंदसौर में 2000 मेगावाट का प्रोजेक्ट
मुख्यमंत्री के मुताबिक नीमच-मंदसौर में 2000 मेगावाट क्षमता का बड़ा प्रोजेक्ट स्थापित किया जा रहा है। आमतौर पर परियोजना को पूरा होने में चार से छह वर्ष लगते हैं, लेकिन मध्यप्रदेश में इसे दो से ढाई वर्ष में पूरा करने का लक्ष्य है। सरकार बिजली उत्पादन की चुनौतियों के समाधान पर काम कर रही है।
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सौर-पवन और ऊर्जा भंडारण पर जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि थर्मल पावर और अन्य पारंपरिक स्रोतों के साथ सौर, पवन और पंप स्टोरेज पर जोर दिया जा रहा है। उन्होंने ऊर्जा उत्पादन के साथ पर्यावरण संरक्षण को भी जरूरी बताया।
ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने कहा कि बढ़ती बिजली मांग के बीच व्यवस्था को विश्वसनीय, टिकाऊ और किफायती बनाना जरूरी है। सौर, पवन और ऊर्जा भंडारण का संतुलित मिश्रण तैयार करना होगा, ताकि ऊर्जा संक्रमण की लागत बढ़ने का असर उपभोक्ताओं पर न पड़े। उन्होंने कहा कि सम्मेलन से ऐसे सुझाव मिलने की उम्मीद है, जो बिजली वितरण कंपनियों को सक्षम और वित्तीय रूप से मजबूत बनाने में मदद करेंगे।

