बालाघाट: मध्य प्रदेश के बालाघाट में आदिवासी बच्चों की मौत का मामला अब राजनीतिक रूप से भी गरमा गया है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी गुरुवार को बालाघाट पहुंचे और प्रभावित परिवारों से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने परिवारों की समस्याएं सुनीं और बच्चों की मौत को लेकर केंद्र और मध्य प्रदेश सरकार पर सवाल उठाए।
30 से ज्यादा बच्चों की मौत का मामला
बालाघाट के बैहर और बिरसा क्षेत्र के आदिवासी बहुल गांवों में पिछले कुछ महीनों के दौरान 30 से ज्यादा बच्चों की मौत की जानकारी सामने आई है। हालांकि मौतों की संख्या को लेकर अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं।
अलग-अलग मामलों में बच्चों में मलेरिया, खसरा, कुपोषण, एनीमिया, डिहाइड्रेशन और सांस से जुड़ी गंभीर समस्याएं सामने आई हैं। अब तक उपलब्ध जानकारी में सभी बच्चों की मौत के पीछे किसी एक बीमारी को कारण नहीं माना गया है।
इस मामले में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट भी राज्य सरकार से जवाब मांग चुका है। प्रभावित इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं, इलाज और दूसरी बुनियादी सुविधाओं को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।
राहुल गांधी ने कहा- सरकार अपना काम करे
प्रभावित परिवारों से मिलने के बाद राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि आदिवासी इलाकों में लोगों को स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार जैसी जरूरी सुविधाएं पर्याप्त रूप से नहीं मिल रही हैं। उन्होंने कहा कि बालाघाट पहुंचने के बाद ऐसा लगा कि यहां लोगों को उनके हाल पर छोड़ दिया गया है।
राहुल गांधी ने मध्य प्रदेश सरकार की व्यवस्था को लेकर कड़ी आलोचना की और इसे सरकार की पूरी विफलता बताया। उन्होंने कहा कि सरकार विकास की बात करती है, लेकिन जब आदिवासी परिवारों को मदद की जरूरत पड़ती है तो उन्हें पर्याप्त सहायता नहीं मिलती।
उन्होंने आदिवासी परिवारों की जमीन, मनरेगा, वन अधिकार कानून और भूमि अधिकार से जुड़े मामलों का भी जिक्र किया। साथ ही सरकार से इन इलाकों में अस्पताल, स्कूल और रोजगार से जुड़ी सुविधाएं बेहतर करने की मांग की।
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लोकसभा में मुद्दा उठाने की बात
राहुल गांधी ने कहा, कि वह बालाघाट के आदिवासी बच्चों की मौत का मुद्दा लोकसभा में उठाएंगे। उन्होंने कहा कि सिर्फ बालाघाट ही नहीं, बल्कि देशभर में आदिवासी समुदाय से जुड़े स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार और अधिकारों के मुद्दों पर भी बात की जाएगी।
उन्होंने प्रभावित परिवारों को भरोसा दिलाया कि उनकी समस्याओं और मांगों को आगे उठाया जाएगा। वहीं बच्चों की मौत के बाद अब स्वास्थ्य व्यवस्था और आदिवासी क्षेत्रों में मिलने वाली सरकारी सुविधाओं को लेकर प्रदेश में राजनीतिक बहस तेज हो गई है।

