उप कुलसचिवों को पदोन्नति के बाद मिली नई जिम्मेदारी, दो वर्ष की परिवीक्षा अवधि रहेगी लागू
भोपाल। Registrar Transfer Posting: मध्यप्रदेश के उच्च शिक्षा विभाग ने प्रदेश के 10 विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों में कुलसचिव स्तर पर बड़ा प्रशासनिक फेरबदल किया है। विभाग ने विभिन्न विश्वविद्यालयों में पदस्थ उप कुलसचिवों को पदोन्नत करते हुए नई पदस्थापना के आदेश जारी किए हैं। 1 अक्टूबर को जारी आदेश के मुताबिक 10 अधिकारियों को कुलसचिव के पद पर स्थानापन्न रूप से पदस्थ किया गया है।
आदेश के अनुसार सभी अधिकारियों की पदोन्नति दो वर्ष की परिवीक्षा अवधि के अधीन रहेगी। संबंधित अधिकारियों को नवीन पदस्थापना स्थल पर तत्काल प्रभाव से कार्यभार ग्रहण करने के निर्देश दिए गए हैं। उन्हें सात दिन के भीतर नई पदस्थापना वाले स्थान पर कार्यभार ग्रहण कर इसकी सूचना उच्च शिक्षा विभाग को देने को कहा गया है।
इन अधिकारियों को मिली नई जिम्मेदारी
- अनिल कुमार शर्मा – सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय, उज्जैन के कुलसचिव।
- डॉ. केके बग्गा – जीवाजी विश्वविद्यालय, ग्वालियर के कुलसचिव।
- डॉ. अजीत श्रीवास्तव – अटल बिहारी वाजपेयी सुशासन एवं नीति विश्लेषण संस्थान, भोपाल में कुलसचिव। वे प्रतिनियुक्ति पर रहेंगे और उनका मूल संवर्ग कुलसचिव है।
- डॉ. अजय वर्मा – टंट्या भील विश्वविद्यालय, खरगोन के कुलसचिव।
- प्रज्ज्वल खरे – देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इंदौर के कुलसचिव।
- स्वाति वशिष्ठ – अटल बिहारी वाजपेयी हिंदी विश्वविद्यालय, भोपाल की कुलसचिव।
- शैलेन्द्र कुमार जैन – राजा शंकर शाह विश्वविद्यालय, छिंदवाड़ा के कुलसचिव।
- रचना ठाकुर – डॉ. बीआर अंबेडकर सामाजिक विज्ञान विश्वविद्यालय, महू की कुलसचिव।
- डॉ. सोनवाल – क्रांतिवीर तात्या टोपे विश्वविद्यालय, गुना के कुलसचिव।
- सुषमा सैयम – महात्मा गांधी चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय, चित्रकूट की कुलसचिव।
उज्जैन, इंदौर और भोपाल में भी बदलाव
नई पदस्थापनाओं में उज्जैन के सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय से जुड़े अधिकारियों को भी नई जिम्मेदारियां दी गई हैं। वहीं देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इंदौर से प्रज्ज्वल खरे और रचना ठाकुर को नई पदस्थापना मिली है। भोपाल में अटल बिहारी वाजपेयी हिंदी विश्वविद्यालय और अटल बिहारी वाजपेयी सुशासन एवं नीति विश्लेषण संस्थान में भी कुलसचिव स्तर पर बदलाव किया गया है।
उच्च शिक्षा विभाग के इन आदेशों के बाद प्रदेश के विभिन्न विश्वविद्यालयों में प्रशासनिक स्तर पर नई व्यवस्था लागू होगी।

