मुंबई। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के तहत नाम हटाए जाने के मुद्दे पर कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने चुनाव आयोग के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग करते हुए चेतावनी दी कि यदि वह पद नहीं छोड़ते हैं, तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इस्तीफा देना चाहिए। दिपके ने आरोप लगाया कि पिछले दो वर्षों में करीब 13 करोड़ मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं। उन्होंने इसे ‘वोट चोरी’ बताते हुए भाजपा की चुनावी रणनीति पर सवाल उठाए। हालांकि, उनके आरोपों और आंकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
दिपके ने मुंबई के दादर स्थित छत्रपति शिवाजी महाराज पार्क में आयोजित विरोध प्रदर्शन के दौरान कहा कि यदि केंद्र सरकार ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा सुनिश्चित नहीं करती है, तो जंतर-मंतर पर दोबारा आंदोलन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि उन्हें तीन दिन के बजाय तीन महीने के लिए भी जेल में डाल दिया जाए, तब भी वह लौटकर विरोध जारी रखेंगे। इस दौरान उन्होंने ‘ज्ञानेश कुमार मस्ट गो’ और ‘मैं वापस आऊंगा’ के नारे लगाए।
भाजपा पर चुनावी गड़बड़ी के आरोप
दिपके ने आरोप लगाया कि वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में अपेक्षित सीटें नहीं मिलने के बाद भाजपा ने महाराष्ट्र, दिल्ली, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में कथित चुनावी धोखाधड़ी की। उन्होंने दावा किया कि मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के कारण ममता बनर्जी, एमके स्टालिन और अरविंद केजरीवाल जैसे नेताओं को नुकसान हुआ। उन्होंने भाजपा की रणनीति को ‘एक देश, एक चुनाव’ से ‘एक देश, एक पार्टी’ की ओर बढ़ने वाला बताया।
विपक्षी दलों ने भी उठाई इस्तीफे की मांग
प्रदर्शन में मुंबई और अन्य क्षेत्रों से बड़ी संख्या में युवा शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने तख्तियां लेकर नारेबाजी की। इस दौरान नुक्कड़ नाटक और संगीत प्रस्तुतियां भी हुईं। कांग्रेस, शिवसेना और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना की ओर से भी ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर विरोध का आह्वान किया गया था।
दिपके ने भाजपा पर कुछ राज्यों में विपक्षी सरकारों को लेकर कथित राजनीतिक रणनीति अपनाने का आरोप भी लगाया। उन्होंने दावा किया कि 2022 से 2026 के बीच 111 मौजूदा सांसद और विधायक चुनाव जीतने के बाद पार्टी बदल चुके हैं। उन्होंने मतदाता सूची की पारदर्शिता और चुनाव आयोग की जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग करते हुए चेतावनी दी कि मांगें पूरी नहीं होने पर आंदोलन जारी रहेगा। उनके दावों की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है।

