भोपाल: राजधानी भोपाल में सौतेली बेटी की हत्या करने की कोशिश के मामले में अदालत ने आरोपी पिता को सात साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। आरोपी ने बेटी को रिश्तेदार के घर छोड़ने के बहाने मोटरसाइकिल पर बैठाया और सुनसान जगह ले जाकर रेडियम कटर से उसका गला काट दिया था। गंभीर रूप से घायल बेटी किसी तरह सड़क तक पहुंची, जहां लोगों ने उसे अस्पताल पहुंचाया। मामले में डीएनए रिपोर्ट और अन्य साक्ष्य आरोपी को दोषी साबित करने में अहम रहे।
रिश्तेदार के घर छोड़ने के बहाने ले गया था पिता
घटना 29 जनवरी 2024 की रात करीब 9 बजे की है। पीड़िता प्रीति लोधी के अनुसार, उसके पिता तेज सिंह लोधी ने उसे ताऊ राजेश लोधी के घर छोड़ने की बात कही थी। इसके बाद वह प्रीति को मोटरसाइकिल पर बैठाकर अपने साथ ले गया।
रास्ते में एक सुनसान जगह पर झाड़ियों के पास आरोपी ने मोटरसाइकिल रोक दी और प्रीति को नीचे उतारा। इसके बाद पीछे से उसका मुंह दबाकर कटर से उसके गले पर वार कर दिया। गंभीर चोट लगने से प्रीति के गले से खून बहने लगा और वह झाड़ियों में गिरकर बेहोश हो गई।
होश आने पर किसी तरह सड़क तक पहुंची पीड़िता
कुछ समय बाद जब प्रीति को होश आया तो वह घायल हालत में किसी तरह झाड़ियों से निकलकर सड़क तक पहुंची। उसके गले से लगातार खून बह रहा था। सड़क पर मौजूद कुछ लोगों ने उसकी हालत देखी और तुरंत अस्पताल पहुंचाया।
30 जनवरी 2024 को अस्पताल प्रबंधन ने घटना की जानकारी कोहेफिजा थाना पुलिस को दी। पुलिस ने अस्पताल पहुंचकर पीड़िता के बयान दर्ज किए और मामले की जांच शुरू की।
आरोपी के घर से मिला कटर, डीएनए रिपोर्ट में हुई पुष्टि
पुलिस ने आरोपी तेज सिंह लोधी के खिलाफ अपराध क्रमांक 51/2024 के तहत हत्या के प्रयास का मामला दर्ज किया। जांच के दौरान घटनास्थल से कटर की पत्ती, पीड़िता की चप्पल और बैग जब्त किए गए।
इसके बाद आरोपी की निशानदेही पर उसके घर से पैंट की जेब में रखा कटर का बाकी हिस्सा भी बरामद किया गया। पुलिस ने कटर पर लगे खून की डीएनए जांच कराई, जिसकी रिपोर्ट सकारात्मक पाई गई।
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अदालत ने सुनाई सात साल के सश्रम कारावास की सजा
विशेष लोक अभियोजक ऋषिराज द्विवेदी ने बताया कि भोपाल के 21वें अपर सत्र न्यायाधीश हिमांशु कौशल की अदालत ने मामले में फैसला सुनाया।
अदालत ने अभियोजन पक्ष की ओर से प्रस्तुत दस्तावेजों, डीएनए रिपोर्ट, गवाहों के बयान और अन्य साक्ष्यों के आधार पर आरोपी तेज सिंह लोधी को भारतीय दंड संहिता की धारा 307 के तहत दोषी पाया। आरोपी को सात साल के सश्रम कारावास और पांच हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया गया है। मामले में शासन की ओर से विशेष लोक अभियोजक ऋषिराज द्विवेदी ने पैरवी की।

