नई दिल्ली: भारतीय वायुसेना को 31 अक्टूबर को नया प्रमुख मिलेगा। एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित इस दिन एयर चीफ मार्शल का पदभार संभालेंगे। वह मौजूदा वायुसेना प्रमुख एयर मार्शल अमर प्रीत सिंह की जगह लेंगे, जो 31 अक्टूबर को सेवानिवृत्त होंगे। आशुतोष दीक्षित फिलहाल वाइस एयर चीफ मार्शल के पद पर हैं।
करीब चार दशक के सैन्य करियर में आशुतोष दीक्षित ने ऑपरेशनल मिशनों, विमान परीक्षण और प्रशिक्षण से जुड़ी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाली हैं। वह कारगिल युद्ध के दौरान भी भारतीय वायुसेना के अभियानों में शामिल रहे हैं।
20 से अधिक तरह के विमानों का अनुभव
एयर मार्शल दीक्षित ने अपने करियर में 20 से अधिक तरह के विमानों को उड़ाया है। इनमें मिराज-2000, मिग के विभिन्न संस्करण, जगुआर, तेजस और हॉक जैसे लड़ाकू विमान शामिल हैं। इसके अलावा उन्होंने IL-78, AN-32, किरण, HPT-32 और एवरो जैसे विमानों का भी संचालन किया है।
उन्होंने 3,500 घंटे से अधिक उड़ान का अनुभव हासिल किया है। वह एक्सपेरिमेंटल टेस्ट पायलट और क्वालिफाइड फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर भी हैं।
कारगिल से ऑपरेशन सिंदूर तक अहम भूमिका
आशुतोष दीक्षित ने ऑपरेशन सफेद सागर, ऑपरेशन रक्षक, कोप-इंडिया और ऑपरेशन सिंदूर सहित कई सैन्य अभियानों और अभ्यासों में हिस्सा लिया है। भारतीय वायुसेना के स्वदेशी हल्के लड़ाकू विमान तेजस और अन्य स्वदेशी विमान परियोजनाओं को आगे बढ़ाने में भी उनकी भूमिका रही है।
29 जून 2026 को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें परम विशिष्ट सेवा मेडल से सम्मानित किया था।
टेस्ट पायलट के तौर पर भी लंबा अनुभव
टेस्ट पायलट के रूप में दीक्षित ने विमानों की क्षमताओं और तकनीकी प्रणालियों के परीक्षण में काम किया है। टेस्ट पायलट नए या अपग्रेड किए गए विमानों की उड़ान के दौरान उनके नियंत्रण, स्थिरता और प्रदर्शन का आकलन करते हैं।
विमानों में लगाए गए नए रडार, हथियार प्रणालियों और इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम के परीक्षण में भी टेस्ट पायलटों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। उनके आकलन के आधार पर विमान को आगे की प्रक्रिया के लिए मंजूरी दी जाती है।
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1986 में वायुसेना की फाइटर स्ट्रीम में हुए थे शामिल
आशुतोष दीक्षित को 6 दिसंबर 1986 को भारतीय वायुसेना की फाइटर स्ट्रीम में कमीशन मिला था। वह नेशनल डिफेंस एकेडमी, डिफेंस स्टाफ सर्विस कॉलेज और नेशनल डिफेंस कॉलेज के पूर्व छात्र हैं।
31 अक्टूबर को वायुसेना प्रमुख का पद संभालने के बाद उनके सामने वायुसेना के आधुनिकीकरण, स्वदेशी विमान परियोजनाओं और नई तकनीकों को मजबूत करने जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां होंगी।

