विदिशा: जिले में सोयाबीन की फसल को लेकर किसानों की चिंता बढ़ती जा रही है। कहीं फसल समय से पहले पीली पड़ने और फूल झड़ने की शिकायत है, तो कहीं कटाई के बाद उत्पादन बेहद कम निकल रहा है। गुलाबगंज क्षेत्र के किसानों का कहना है कि कई खेतों में स्थिति ऐसी है कि फसल पर किया गया खर्च निकालना भी मुश्किल हो रहा है। इसी बीच कृषि वैज्ञानिकों की टीम ने ग्यारसपुर विकासखंड के विभिन्न गांवों में पहुंचकर सोयाबीन की स्थिति का जायजा लिया है।
खेतों में पहुंचे वैज्ञानिक, फसल की बारीकी से की जांच
कृषि वैज्ञानिकों के दल ने ग्राम अंडियाकलां, गूलरखेड़ी, अटारीखेजड़ा, सुआखेड़ी और चाठोली में सोयाबीन के खेतों का निरीक्षण किया। इस दौरान अलग-अलग किस्मों की स्थिति, पौधों की वृद्धि, रोग एवं कीट प्रकोप और संभावित उत्पादन को देखा गया। किसानों से भी बातचीत कर उनकी समस्याओं की जानकारी ली गई।
दल में राष्ट्रीय सोयाबीन अनुसंधान संस्थान इंदौर के पादप रोग विशेषज्ञ डॉ. संजीव कुमार, कीट विशेषज्ञ डॉ. लोकेश मीणा, पादप प्रजनक डॉ. अनिता राणा और कृषि विज्ञान केंद्र विदिशा के कृषि वैज्ञानिक अक्षय उज्जवल शामिल रहे।
वैज्ञानिकों ने किसानों को खेत की स्थिति के अनुसार रोग और कीट नियंत्रण के साथ बेहतर फसल प्रबंधन के सुझाव दिए। किसानों से कहा गया कि फसल में किसी भी रोग या कीट के लक्षण दिखाई देने पर लगातार निगरानी रखें और विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार ही प्रबंधन करें।
गुलाबगंज में कम पैदावार ने बिगाड़ा किसानों का हिसाब
दूसरी ओर गुलाबगंज क्षेत्र में सोयाबीन की कटाई के साथ कम उत्पादन की तस्वीर सामने आ रही है। फसल पकने के बाद किसान और मजदूर कटाई में जुटे हैं। जिन खेतों में फसल कुछ बेहतर है वहां हार्वेस्टर का उपयोग हो रहा है, लेकिन कई खेतों में कम पैदावार के कारण किसानों को मजदूरों से कटाई करानी पड़ रही है।
स्थानीय स्तर पर मजदूरी महंगी होने के कारण कटनी और शहडोल सहित दूसरे क्षेत्रों से भी मजदूर बुलाए गए हैं। किसानों का कहना है कि जितनी फसल निकल रही है, कई जगह उसके मुकाबले कटाई सहित दूसरे खर्च काफी अधिक पड़ रहे हैं।
ग्राम मुंगवारा के किसान इदरीश खान के अनुसार इस वर्ष एक बीघा जमीन से औसतन करीब एक बोरा सोयाबीन ही निकल रहा है। बीज, खाद, दवा, जुताई, बोवनी और कटाई पर पहले ही काफी रकम खर्च हो चुकी है। कम उत्पादन के कारण अब लागत की भरपाई होना भी मुश्किल दिखाई दे रहा है।
चक हाटखेड़ा के किसान संतोष सोलंकी का कहना है कि क्षेत्र में बड़ी संख्या में किसान सोयाबीन पर निर्भर हैं। धान की खेती में पानी और खर्च अधिक लगने के कारण किसान सोयाबीन को प्राथमिकता देते हैं, लेकिन इस बार कम उत्पादन ने उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया है।
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अगली फसल से लेकर शादी-विवाह तक के खर्च की चिंता
क्षेत्र के किसानों का कहना है कि गुनआ, अंडिया, मुंगवारा, माला, चटोली, हथियाखेड़ा, सोजना वन, रकोली, एरण, इकोदिया और कारारिया सहित कई गांवों में सोयाबीन का उत्पादन प्रभावित हुआ है। कुछ स्थानों पर फसल समय से पहले पीली पड़ गई और फूल झड़ गए, जबकि कुछ जगह ज्यादा बारिश से तैयार फसल खराब होने की बात किसान कह रहे हैं।
किसानों की चिंता केवल मौजूदा नुकसान तक सीमित नहीं है। आने वाली गेहूं और चने की फसल के लिए जुताई, बीज, खाद और बोवनी का खर्च कैसे जुटेगा, यह बड़ा सवाल बन गया है। कई परिवारों में आने वाले समय में शादी-विवाह और दूसरे जरूरी कार्यक्रम भी हैं, जिससे आर्थिक दबाव और बढ़ गया है।
किसानों ने पूर्व में तहसीलदार को कलेक्टर के नाम ज्ञापन देकर फसल नुकसान का मुद्दा उठाया था। अब किसानों की मांग है कि प्रभावित क्षेत्रों में नुकसान का उचित आकलन कराया जाए और जिन किसानों की फसल को भारी नुकसान हुआ है, उन्हें पर्याप्त मुआवजा देकर राहत दी जाए।
निरीक्षण के दौरान डीडीए सचिन जैन, परियोजना संचालक आत्मा एल.एस. चारेल, वरिष्ठ कृषि विस्तार अधिकारी रूपेश बघेल, निशि जैन, कृषि विस्तार अधिकारी गोपाल बघेल और चंद्रकांत सिलावट सहित क्षेत्र के किसान भी मौजूद रहे।

