रियाद: मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच गुरुवार को सऊदी अरब की राजधानी रियाद में कई धमाके होने की खबर सामने आई है। इनमें एक बड़ा धमाका किंग खालिद अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर भी होने की जानकारी मिली है। घटना के बाद एयरपोर्ट पर विमानों की आवाजाही रोक दी गई और यात्रियों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया।
धमाकों के बाद इलाके में धुआं उठता दिखाई दिया। मौके पर दमकल और एंबुलेंस की टीमें भेजी गईं। हालांकि, इन धमाकों में कितने लोग घायल हुए हैं या कितना नुकसान हुआ है, इसकी आधिकारिक जानकारी अभी सामने नहीं आई है।
धमाकों के पीछे किसका हाथ?
सऊदी अरब में हुए धमाकों के पीछे किसका हाथ है, इसे लेकर शुरुआत में स्थिति स्पष्ट नहीं थी। हालांकि, यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने गुरुवार को दावा किया कि उन्होंने रियाद के किंग खालिद अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट को बैलिस्टिक मिसाइल से निशाना बनाया है।
हूती संगठन पिछले कुछ दिनों से सऊदी अरब के अलग-अलग ठिकानों पर हमले करने का दावा कर रहा है। इससे पहले भी सऊदी अरब के तेल प्रतिष्ठानों और अन्य महत्वपूर्ण स्थानों को निशाना बनाने की खबरें सामने आ चुकी हैं।
हालांकि, हूती संगठन के दावे की स्वतंत्र पुष्टि और सऊदी सरकार की विस्तृत प्रतिक्रिया का इंतजार है।
एयरपोर्ट पर रोकी गई उड़ानें
धमाकों की खबर के बाद रियाद एयरपोर्ट पर सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई। यात्रियों को एयरपोर्ट से बाहर निकालने की कार्रवाई की गई और उड़ानों का संचालन रोक दिया गया।
एयरपोर्ट पर धमाके की खबर ने अंतरराष्ट्रीय हवाई यात्रा को लेकर भी चिंता बढ़ा दी है। सऊदी अरब के प्रमुख एयरपोर्टों से दुनिया के कई देशों के लिए उड़ानें संचालित होती हैं।
मध्य पूर्व में लगातार बढ़ रहा तनाव
सऊदी अरब में हुए ये धमाके ऐसे समय सामने आए हैं, जब मध्य पूर्व में ईरान से जुड़े संघर्ष के कारण पहले से तनाव बना हुआ है। यमन में हूती विद्रोहियों और सऊदी समर्थित बलों के बीच भी संघर्ष तेज हो गया है। लाल सागर और होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास जहाजों पर हमलों की घटनाएं सामने आ रही हैं।
इन समुद्री रास्तों से दुनिया के कई देशों तक तेल और अन्य जरूरी सामान पहुंचाया जाता है। ऐसे में लगातार हो रहे हमलों से अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर भी असर पड़ने की आशंका है।
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कच्चे तेल की कीमतों में भी उछाल
मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और तेल आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका के बीच गुरुवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें भी तेजी से बढ़ीं।
ब्रेंट क्रूड की कीमत लगभग 105 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई। वहीं अमेरिकी कच्चे तेल की कीमत भी 92 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर चली गई। तेल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी का असर भारत समेत कई देशों पर पड़ सकता है। खासकर उन देशों के लिए चिंता बढ़ सकती है, जो अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा दूसरे देशों से आयात करते हैं।

