ओस्लो: नॉर्वे की नोबेल समिति ने 2026 के नोबेल शांति पुरस्कार के लिए भारतवंशी नवनीतम नवी पिल्लै के नाम का ऐलान किया है। दक्षिण अफ्रीका में जन्मीं पिल्लै ने रंगभेद के खिलाफ संघर्ष में अहम भूमिका निभाई और नेल्सन मंडेला समेत कई लोगों के अधिकारों की रक्षा के लिए काम किया।
उन्हें युद्ध अपराध और नरसंहार के दोषियों को सजा दिलाने तथा अंतरराष्ट्रीय कानून को मजबूत करने के प्रयासों के लिए सम्मानित किया गया है। उनका काम मानवाधिकारों और न्याय के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान के रूप में देखा जाता है।
दुनिया में युद्ध और संघर्ष बढ़ रहे हैं
नोबेल समिति ने कहा कि दुनिया में युद्ध और संघर्ष बढ़ रहे हैं। ऐसे में शांति बनाए रखने के लिए अंतरराष्ट्रीय कानून का पालन करना और उसे मजबूत करना बेहद जरूरी है।
स्टॉकहोम में सम्मानित किया जाएगा
पिल्लै को दिसंबर में स्वीडन की राजधानी स्टॉकहोम में सम्मानित किया जाएगा। उन्हें मेडल, डिप्लोमा और पुरस्कार राशि दी जाएगी। 2026 में नोबेल पुरस्कार की राशि करीब 11.5 करोड़ रुपए है।
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दादा भारत से मजदूर बनकर दक्षिण अफ्रीका गए थे
नवनीतम नवी पिल्लै का जन्म 23 सितंबर 1941 को दक्षिण अफ्रीका के डरबन में हुआ था। उनका परिवार भारतीय तमिल मूल का है। उनके दादा 1890 के दशक में भारत से बंधुआ मजदूर बनकर दक्षिण अफ्रीका गए थे। वहां वे चीनी के बागानों में काम करते थे।
नवी पिल्लै ने डरबन विश्वविद्यालय से कानून की पढ़ाई की। उन्होंने 1963 में ग्रेजुएशन और 1965 में कानून की डिग्री हासिल की। इसके बाद अमेरिका की हार्वर्ड यूनिवर्सिटी से मास्टर और डॉक्टरेट की पढ़ाई की।
1967 में उन्होंने नेटाल प्रांत में अपनी लॉ फर्म शुरू की। रंगभेद के दौर में कोई भी फर्म उन्हें नौकरी देने को तैयार नहीं थी। ऐसे में उन्होंने खुद की फर्म खोलकर वकालत शुरू की। वह ऐसा करने वाली पहली महिला बनीं।

