दमोह: जिले में राजस्व प्रकरणों और नामांतरण की फाइलों में चल रही भारी अनियमितताओं पर प्रशासन ने अब तक की सबसे कठोर कार्रवाई की है। दमयंती नगर तहसील में आम जनता की शिकायतों और प्रकरणों के निराकरण में गंभीर गड़बड़ी पाए जाने पर सागर संभाग कमिश्नर ने तहसीलदार रॉबिन जैन और तत्कालीन रीडर प्रियांशु को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।
इसके साथ ही दमोह एसडीएम सौरभ गंधर्व को पद से हटाते हुए उनके विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा गया है।
कलेक्टर की गोपनीय जांच में खुली फाइलों की मनमानी
दमोह कलेक्टर प्रताप नारायण यादव को दमयंती नगर तहसील से जुड़ी लगातार शिकायतें प्राप्त हो रही थीं। इस पर संज्ञान लेते हुए कलेक्टर ने 30 सितंबर को जिले की सभी छह तहसीलों के राजस्व न्यायालयों का विशेष प्रशासनिक दल से गोपनीय निरीक्षण कराया।
निरीक्षण रिपोर्ट में दमयंती नगर तहसील के अंतर्गत व्यापक पैमाने पर अनियमितताएं प्रमाणित पाई गई। इसके आधार पर कलेक्टर ने निलंबन प्रस्ताव सागर कमिश्नर को भेजा, जिस पर त्वरित अमल करते हुए तहसीलदार और रीडर को सस्पेंड कर दिया गया।
निलंबन आदेश में स्पष्ट उल्लेख है कि राजस्व न्यायालय के प्रकरणों में संबंधित पक्षों को वैधानिक सुनवाई का अवसर दिए बिना ही सीधे आदेश पारित कर दिए गए।
अवैध कॉलोनियों का नामांतरण और नजूल नियमों का उल्लंघन
जांच में यह भी सामने आया कि अवैध कॉलोनियों के विचलन पत्र (डायवर्जन) का बिना विधिवत प्रक्रिया के नामांतरण किया गया। नजूल भूमि से जुड़े मामलों में अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर अनाधिकृत आदेश जारी किए गए।
सरकारी भूमि पर हुए अतिक्रमणों को हटाने के स्थान पर उसे बढ़ावा देने तथा शासकीय डायवर्जन शुल्क में राजस्व को भारी वित्तीय नुकसान पहुंचाने की पुष्टि हुई है।
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नए अधिकारियों को अतिरिक्त प्रभार
प्रशासन ने तत्काल व्यवस्था के तहत नायब तहसीलदार रघुनंदन चतुर्वेदी को दमयंती नगर तहसील के तहसीलदार का अतिरिक्त प्रभार सौंपा है।
वहीं, एसडीएम सौरभ गंधर्व को हटाए जाने के बाद डिप्टी कलेक्टर संजय दुबे को दमोह एसडीएम की जिम्मेदारी दी गई है।

