भोपाल: मध्य प्रदेश में बाट-तराजू, इलेक्ट्रॉनिक कांटे और पेट्रोल पंप सहित नाप-तौल के उपकरणों से जुड़े लाइसेंस नियमों में बदलाव किया गया है। राज्य सरकार ने छह प्रमुख लाइसेंस सेवाओं को लोक सेवा गारंटी अधिनियम के दायरे से बाहर कर दिया है। इससे लाइसेंस जारी करने और उनके नवीनीकरण के लिए निर्धारित 30 दिन की समय-सीमा समाप्त हो गई है। अब आवेदकों को पहले की तरह तय समय में सेवा मिलने की कानूनी गारंटी नहीं रहेगी।
लोक सेवा प्रबंधन विभाग के अपर सचिव अरुण परमार ने इस संबंध में अधिसूचना जारी की है। इन सेवाओं में नाप-तौल उपकरणों के निर्माता, विक्रेता और मरम्मतकर्ता के नए लाइसेंस जारी करने तथा लाइसेंस के नवीनीकरण से जुड़ी सेवाएं शामिल हैं।
सरकार ने 29 जुलाई 2021 को इन सेवाओं को लोक सेवा गारंटी अधिनियम के दायरे में शामिल किया था। इसके तहत आवेदन के निपटारे के लिए 30 दिन की समय-सीमा तय थी। निर्धारित समय में काम नहीं होने पर आवेदक अपील कर सकते थे और जिम्मेदार अधिकारी पर जुर्माना लगाने का प्रावधान था। नई व्यवस्था में यह समयबद्ध गारंटी समाप्त हो गई है।
छह लाइसेंस सेवाओं पर क्या बदला?
नाप-तौल उपकरणों के कारोबार से जुड़ी छह सेवाओं को लोक सेवा गारंटी अधिनियम से बाहर किया गया है। इनमें निर्माता, विक्रेता और मरम्मतकर्ता के नए लाइसेंस जारी करने और उनके नवीनीकरण की सेवाएं शामिल हैं।
इस बदलाव का सीधा असर उन कारोबारियों पर पड़ेगा, जिन्हें नाप-तौल उपकरण बनाने, बेचने या उनकी मरम्मत करने के लिए लाइसेंस लेना अथवा उसका नवीनीकरण कराना होता है। अब इन आवेदनों के निपटारे के लिए पहले जैसी 30 दिन की समयबद्ध गारंटी लागू नहीं रहेगी।
पेट्रोल पंप से अस्पताल की बीपी मशीन तक सत्यापन शुल्क तय
सरकार ने नाप-तौल उपकरणों के सत्यापन के लिए अलग-अलग शुल्क निर्धारित किए हैं। इसका उद्देश्य उपकरणों की जांच और सत्यापन के लिए सरकारी दरें तय करना है।
- पेट्रोल-डीजल पंप: प्रति पंप 3,000 रुपये।
- सीएनजी और एलपीजी डिस्पेंसर: प्रति यूनिट 5,000 रुपये।
- 20 किलोग्राम तक के इलेक्ट्रॉनिक कांटे: 200 रुपये।
- पांच टन से अधिक क्षमता वाले कांटे: 5,000 रुपये।
- अस्पतालों की बीपी मशीनें: सत्यापन के लिए 200 रुपये।
इन दरों से कारोबारियों और संबंधित संस्थानों को सत्यापन शुल्क की जानकारी मिलेगी। हालांकि, लाइसेंस सेवाओं को लोक सेवा गारंटी से बाहर करने का ग्राहकों को सीधे तौर पर कोई अतिरिक्त लाभ नहीं मिलता। ग्राहकों के हितों की सुरक्षा उपकरणों की सही जांच और नियमों के पालन पर निर्भर करेगी।
लाइसेंस के लिए कितना शुल्क देना होगा?
नाप-तौल उपकरणों से जुड़े कारोबार के लिए लाइसेंस शुल्क भी निर्धारित किया गया है।
- निर्माता का लाइसेंस: 1.50 लाख रुपये।
- विक्रेता का लाइसेंस: 1 लाख रुपये।
- मरम्मतकर्ता का लाइसेंस: 50 हजार रुपये।
इसके अलावा, दूसरे राज्य में बने उपकरणों की मरम्मत करने वाले कांटा सुधारकों को अलग लाइसेंस से छूट दी गई है।
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कम तौलने पर एक लाख रुपये तक जुर्माना
नाप-तौल के नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कार्रवाई का प्रावधान भी है। अमानक बाट-तराजू का इस्तेमाल करने, ग्राहकों को कम तौलने या बिना पंजीयन कारोबार करने पर एक लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।
इसका उद्देश्य ग्राहकों को सही तौल सुनिश्चित करना और नाप-तौल उपकरणों के इस्तेमाल में निर्धारित मानकों का पालन कराना है। हालांकि, नियमों का वास्तविक असर विभागीय निगरानी और शिकायतों पर होने वाली कार्रवाई पर निर्भर करेगा।
नई व्यवस्था में जहां कारोबारियों को लाइसेंस जारी करने और नवीनीकरण के लिए तय समय में सेवा मिलने की गारंटी नहीं रहेगी, वहीं सत्यापन शुल्क और नियमों के उल्लंघन पर जुर्माने के प्रावधान ग्राहकों के हितों की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण रहेंगे।

