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‘आशीर्वाद का दिया’ कार्यक्रम के टेंडर पर उठे सवाल, कांग्रेस नेता अमित शर्मा ने की CBI जांच की मांग

भोपाल: मध्य प्रदेश पर्यटन विभाग द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के अवसर पर आयोजित ‘आशीर्वाद का दिया’ कार्यक्रम के टेंडर को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। प्रदेश कांग्रेस महासचिव अमित शर्मा ने टेंडर प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए पूरे मामले की CBI जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि सरकारी धन से आयोजित कार्यक्रम में नियमों की अनदेखी कर कुछ चुनिंदा कंपनियों को फायदा पहुंचाए जाने की आशंका है।

महज 74 मिनट में प्रस्ताव जमा करने का समय देने का आरोप

अमित शर्मा के अनुसार, पर्यटन विभाग ने 16 सितंबर को दोपहर 3 बजकर 46 मिनट पर कंपनियों को ईमेल के जरिए टेंडर भेजा था। प्रस्ताव जमा करने के लिए उसी दिन शाम 5 बजे तक का समय दिया गया। यानी कंपनियों को अपनी तैयारी और प्रस्ताव प्रस्तुत करने के लिए केवल 74 मिनट मिले।

उन्होंने आरोप लगाया कि निर्धारित समय समाप्त होने के बाद भी टेंडर प्रक्रिया जारी रखी गई और उसी रात अहमदाबाद की कंपनी ‘गो बनाना’ को काम देने का आदेश जारी कर दिया गया। शर्मा ने सवाल उठाया कि इतनी कम समय-सीमा में कंपनियों के प्रस्तावों का निष्पक्ष मूल्यांकन कैसे किया गया।

4.18 करोड़ के टेंडर और 8.18 करोड़ के प्रस्ताव पर सवाल

कांग्रेस नेता ने दावा किया कि कार्यक्रम के मुख्य टेंडर की राशि करीब 4.18 करोड़ रुपये थी, जबकि दिल्ली की कंपनी ‘दीपाली डिजाइन’ ने लगभग 8.18 करोड़ रुपये का प्रस्ताव दिया था। उन्होंने दोनों राशियों में बड़े अंतर और कंपनी चयन की प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए हैं।

शर्मा ने कहा कि सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि टेंडर में कितनी कंपनियों ने हिस्सा लिया, किन शर्तों पर प्रस्ताव मांगे गए और किस आधार पर संबंधित कंपनी को काम सौंपा गया।

18 करोड़ तक खर्च पहुंचने की आशंका जताई

उज्जैन में आयोजित दीपोत्सव कार्यक्रम के खर्च को लेकर भी अमित शर्मा ने सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यदि 4.18 करोड़ रुपये केवल दीपक जलाने के लिए खर्च किए गए हैं, तो सरकार को प्रति दीपक लागत सार्वजनिक करनी चाहिए।

उन्होंने आशंका जताई कि अतिरिक्त कार्यों और पूरक बिलों के जरिए कार्यक्रम का कुल खर्च 10 से 18 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है। हालांकि, इस संभावित खर्च की स्वतंत्र जांच और दस्तावेजों के सत्यापन की आवश्यकता है।

अधिकारियों की भूमिका की जांच की मांग

अमित शर्मा ने पर्यटन विभाग के अधिकारी देवेंद्र राय और राहुल अर्गल की भूमिका की भी निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि जांच में टेंडर जारी करने से लेकर भुगतान तक की पूरी प्रक्रिया की समीक्षा होनी चाहिए। दोष सिद्ध होने पर संबंधित लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए।

उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि मध्य प्रदेश में इवेंट मैनेजमेंट से जुड़ी कई कंपनियां और युवा उद्यमी मौजूद होने के बावजूद दूसरे राज्यों की कंपनियों को काम देने के लिए किन मानदंडों का पालन किया गया।

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जनता के पैसे का हिसाब दे सरकार

कांग्रेस नेता ने कहा कि मध्य प्रदेश पहले से कर्ज के बोझ से जूझ रहा है। ऐसे में सरकारी आयोजनों पर खर्च होने वाली राशि का पूरा हिसाब जनता के सामने आना चाहिए।

उन्होंने मांग की कि कार्यक्रम से जुड़े टेंडर, कार्यादेश, भुगतान और अतिरिक्त बिलों के दस्तावेज सार्वजनिक किए जाएं। साथ ही पूरे मामले का विस्तृत ऑडिट कराकर CBI से जांच कराई जाए।

अमित शर्मा ने कहा कि कांग्रेस इस मुद्दे को उठाती रहेगी और सरकार से जवाब मांगेगी। वहीं, लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और संबंधित विभाग का पक्ष सामने आना अभी बाकी है। जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि टेंडर प्रक्रिया में किसी प्रकार की अनियमितता हुई थी या नहीं।

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