भोपाल: मध्यप्रदेश में नल-जल योजना के तहत सतना और मैहर जिलों में चल रही परियोजनाओं के खर्च और वास्तविक निर्माण कार्य को लेकर कांग्रेस ने सरकार से जवाब मांगा है। पार्टी का आरोप है कि करीब 3200 करोड़ रुपये की परियोजनाओं में खर्च के मुकाबले जमीन पर हुए काम को लेकर गंभीर सवाल हैं। कांग्रेस नेताओं ने दावा किया कि वास्तविक काम करीब 500 करोड़ रुपये के बराबर होने की बात सामने आई है। हालांकि, इस आकलन का विस्तृत आधार पत्रकार वार्ता में स्पष्ट नहीं किया गया।
मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मीडिया विभाग के अध्यक्ष मुकेश नायक और प्रदेश प्रवक्ता रितेश त्रिपाठी ने शनिवार को पत्रकार वार्ता में परियोजनाओं की बिलिंग, निर्माण में देरी, पाइपलाइन की गुणवत्ता और गांवों में जलापूर्ति की स्थिति पर सवाल उठाए। उन्होंने सतना-मैहर सहित प्रदेश की सभी नल-जल परियोजनाओं का वित्तीय ऑडिट, तकनीकी जांच और भौतिक सत्यापन कराने की मांग की।
1200 करोड़ की योजना में कितने गांवों तक पहुंचा पानी?
कांग्रेस ने मैहर जिले की बाणसागर समूह जलप्रदाय योजना का मुद्दा उठाया। नेताओं के मुताबिक, वर्ष 2018 में शुरू हुई इस परियोजना की लागत करीब 1200 करोड़ रुपये है। इसके तहत लगभग 980 पंचायतों तक पानी पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया था। मुकेश नायक ने कहा कि कंपनी करीब 100 गांवों में जलापूर्ति का दावा कर रही है, जबकि शिकायतों में केवल 30 से 40 गांवों तक पानी पहुंचने की बात कही गई है।
कांग्रेस ने सरकार से गांववार स्थिति सार्वजनिक करने की मांग की। पार्टी का कहना है कि केवल कार्य प्रगति या बिलिंग के आंकड़ों से योजना की सफलता तय नहीं हो सकती। यह भी बताना चाहिए कि कितने घरेलू कनेक्शन चालू हैं और किन गांवों में नियमित पानी मिल रहा है।
2000 करोड़ की परियोजना में देरी पर सवाल?
सतना जिले में एलएंडटी से संबंधित करीब 2000 करोड़ रुपये की परियोजना में देरी को लेकर भी कांग्रेस ने सवाल उठाए? नेताओं ने पूछा कि मार्च 2025 की निर्धारित समयसीमा के बाद काम पूरा नहीं होने पर कंपनी के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई। उन्होंने विलंब दंड, भुगतान और निर्माण की वास्तविक प्रगति का विवरण सार्वजनिक करने की मांग की।
कांग्रेस ने सड़क मरम्मत और रेस्टोरेशन के नाम पर प्रति पंचायत दो से तीन करोड़ रुपये तक की कथित अनियमितताओं की जांच कराने को भी कहा। पार्टी के अनुसार, भुगतान और मौके पर हुए काम का मिलान किया जाना चाहिए।
पाइपलाइन की क्षति और गुणवत्ता की जांच की मांग
कांग्रेस ने पाइपलाइन क्षति के 200 करोड़ रुपये से अधिक के दावों और मैहर के बगहा से मझगवां क्षेत्र में करीब 65 किलोमीटर पाइपलाइन क्षतिग्रस्त होने संबंधी आरोपों की स्वतंत्र तकनीकी जांच कराने की मांग की। नेताओं ने करीब 87 प्रतिशत कार्य प्रगति या बिलिंग के दावों का वास्तविक निर्माण से मिलान कराने पर जोर दिया।
पार्टी ने पाइप जॉइंट में इस्तेमाल ग्रीस की गुणवत्ता की प्रयोगशाला में जांच कराने और रामनगर के बड़ा इटमा गांव में पाइप चोरी की एफआईआर से जुड़े दस्तावेजों का सत्यापन करने की मांग भी की। अमरपाटन क्षेत्र के पापड़ा में प्रस्तावित मेगा टैंक के मामले में भूमि अभिलेखों, निर्माण अनुमतियों और न्यायालयीन आदेशों की समीक्षा कराने की मांग की गई।
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कैग रिपोर्ट और जल शुल्क पर भी मांगा जवाब
कांग्रेस नेताओं ने कैग रिपोर्ट, अधिकारियों की कथित आपत्तियों, एफआईआर और सीएम हेल्पलाइन पर दर्ज शिकायतों के संबंध में अब तक हुई कार्रवाई का ब्योरा मांगा। उन्होंने मंत्री प्रतिमा बागरी की कथित नोटशीट, जांच आदेश और उपलब्ध रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग की। पार्टी ने कहा कि अनियमितताएं प्रमाणित होने पर जिम्मेदार कंपनियों और अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई कर सरकारी धन की वसूली की जाए।
कांग्रेस ने वर्ष 2027 में नल-जल योजना के तहत जल शुल्क वसूली की संभावनाओं पर भी सवाल उठाए। नेताओं का कहना है कि शुल्क वसूलने से पहले सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि किन गांवों में नियमित जलापूर्ति हो रही है और कितने कनेक्शन चालू हैं। पत्रकार वार्ता में मैहर जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष धर्मेश घई भी मौजूद रहे।

