सीजेपी ने पुलिस पर लगाया अपहरण का आरोप
अभिजीत दिपके की हिरासत को लेकर सीजेपी ने दिल्ली पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पार्टी के नेता अजिंक्य शिंदे ने दावा किया कि दिपके के परिजनों, वकीलों और पार्टी की टीम को उनकी स्थिति के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई। पार्टी के एक्स खाते पर साझा किए गए एक वीडियो में शिंदे ने सवाल उठाया कि अभिजीत दिपके कहां हैं और उनके बारे में जानकारी क्यों नहीं दी जा रही है।
हालांकि, पुलिस की ओर से दिपके के खिलाफ कानूनी कार्रवाई किए जाने की जानकारी दी गई है। सीजेपी के आरोपों और पुलिस के पक्ष के बीच उनकी हिरासत को लेकर विवाद गहरा गया है।
रिहाई के बाद नेहा बोरा ने उठाए सवाल
रिहाई के बाद नेहा बोरा ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि आंदोलनकारियों को लंबे समय तक हिरासत में रखा जा रहा है और उन्हें कानूनी सहायता मिलने में भी परेशानी होती है। उन्होंने कहा कि पुलिस ने उनसे नाम, पता और अन्य जानकारियां मांगीं, लेकिन काफी देर तक उन्हें बोलने या वकील से सलाह लेने की अनुमति नहीं दी गई।
बोरा के मुताबिक, उनके वकीलों ने उनसे संपर्क करने के लिए पांच से छह घंटे तक प्रयास किया। फोन पर संपर्क स्थापित होने के बाद ही वकीलों को उनसे मिलने की अनुमति मिली। उन्होंने हिरासत की प्रक्रिया और नागरिकों के अधिकारों को लेकर सवाल उठाए।
क्या है पूरा मामला?
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आंदोलन कर रहे युवाओं ने शुक्रवार को कनॉट प्लेस में ‘लहरा दो तिरंगा’ विरोध मार्च निकालने की योजना बनाई थी। मार्च से पहले दिल्ली पुलिस ने नेहा बोरा और अभिजीत दिपके को निवारक हिरासत में लिया।
पुलिस के अनुसार, नेहा बोरा को दिल्ली पुलिस अधिनियम की धारा 65 के तहत हिरासत संबंधी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद रिहा किया गया। वहीं, अभिजीत दिपके के खिलाफ भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 126 और 170 के तहत कार्रवाई शुरू की गई। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, उन्हें गिरफ्तार किया गया है और शनिवार को विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट की अदालत में पेश किया जाएगा।

