भोपाल। मध्य प्रदेश में पर्यावरणीय मंजूरियों और प्रशासनिक कामकाज को लेकर विवाद गहरा गया है। मध्य प्रदेश राज्य स्तरीय पर्यावरण प्रभाव आकलन प्राधिकरण (सिया) के अध्यक्ष शिव नारायण सिंह चौहान ने पर्यावरण विभाग के अपर मुख्य सचिव अनिरुद्ध मुखर्जी समेत तीन वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल को पत्र लिखकर संबंधित अधिकारियों को तत्काल निलंबित करने, आपराधिक प्रकरण दर्ज कराने और कथित अनियमितताओं की केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) से जांच कराने की मांग की है।
चौहान ने अपने पत्र में आरोप लगाया है कि प्राधिकरण के कामकाज में बाधा पहुंचाई जा रही है और पर्यावरणीय स्वीकृतियां जारी करने में गंभीर अनियमितताएं हुई हैं। हालांकि, ये आरोप हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है।
तीन वरिष्ठ अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग
सिया अध्यक्ष ने जिन अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है, उनमें पर्यावरण विभाग के अपर मुख्य सचिव और पर्यावरण नियोजन एवं समन्वय संगठन (ईपीसीओ) के महानिदेशक अनिरुद्ध मुखर्जी, सिया के सदस्य सचिव हर्षल पंचोली और डीम्ड पर्यावरणीय स्वीकृति जारी करने वाले अधिकारी नवनीत मोहन कोठारी शामिल हैं।
तीन महीने से पोर्टल बंद होने का आरोप
मुख्य सचिव को भेजे पत्र में चौहान ने आरोप लगाया कि अधिकारियों की ओर से पर्यावरण कानूनों का उल्लंघन किया जा रहा है और सिया के नियमित कामकाज को प्रभावित किया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि उनके कक्ष का इंटरनेट कनेक्शन काट दिया गया है और पिछले तीन महीने से प्राधिकरण का पोर्टल बंद पड़ा है। इससे कामकाज प्रभावित होने की बात भी कही गई है।
कर्मचारियों की तैनाती पर भी उठाए सवाल
चौहान ने प्राधिकरण में कर्मचारियों की तैनाती और बार-बार किए जा रहे तबादलों पर भी सवाल उठाए हैं। उनके मुताबिक, लाइब्रेरी सहायक राजनेश कुमार को निजी सहायक नियुक्त किया गया है, जबकि उन्हें टाइपिंग का कौशल नहीं है। उन्होंने वकील नामक कर्मचारी की सेवक के रूप में तैनाती पर भी आपत्ति जताई और कहा कि संबंधित कर्मचारी कैंसर से पीड़ित हैं तथा ठीक से चलने में असमर्थ हैं।
चौहान का आरोप है कि एक साल के भीतर सिया के कर्मचारियों की 20 से अधिक बार अदला-बदली की गई। उन्होंने इन बदलावों को प्राधिकरण के कामकाज में बाधा पहुंचाने से जोड़ते हुए जांच की मांग की है।
237 डीम्ड पर्यावरणीय स्वीकृतियों का मामला
विवाद का एक प्रमुख मुद्दा 237 डीम्ड पर्यावरणीय स्वीकृतियां जारी किए जाने का आरोप है। चौहान ने दावा किया कि तत्कालीन सदस्य सचिव के माध्यम से तत्कालीन पर्यावरण विभाग के प्रमुख सचिव नवनीत मोहन कोठारी के कार्यकाल में ये स्वीकृतियां जारी की गईं। उनके अनुसार, इस तरह की स्वीकृतियां जारी करने का कोई वैधानिक प्रावधान नहीं है और पर्यावरणीय मंजूरी देने का अधिकार निर्धारित प्राधिकरणों के पास ही है।
उन्होंने पूर्व सदस्य सचिव उमामहेश्वरी पर भी हर्षल पंचोली के साथ मिलकर प्राधिकरण का कामकाज बाधित करने का आरोप लगाया है।

