चेन्नई: तमिलनाडु में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के रूट मार्च को लेकर चल रहे विवाद में मद्रास हाई कोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने RSS को प्रदेश में निर्धारित स्थानों पर मार्च निकालने की अनुमति दे दी है। इसके साथ ही पुलिस द्वारा बार-बार अनुमति देने से इनकार करने पर भी सवाल उठाए हैं।
RSS ने 18 अक्टूबर, 25 अक्टूबर और 1 नवंबर को तमिलनाडु के अलग-अलग स्थानों पर रूट मार्च आयोजित करने की अनुमति मांगी थी। हालांकि, पुलिस ने सुरक्षा और कानून-व्यवस्था से जुड़े कारणों का हवाला देते हुए आवेदन खारिज कर दिए थे। इसके बाद मामला हाई कोर्ट पहुंचा।
तमिलनाडु में 128 स्थानों पर निकलेगा मार्च
अदालत के फैसले के बाद RSS के लिए 25 अक्टूबर और 1 नवंबर को तमिलनाडु के 128 स्थानों पर रूट मार्च निकालने का रास्ता साफ हो गया है।
मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस जी. लक्ष्मीनारायणन ने तमिलनाडु पुलिस के रवैये पर सवाल उठाए? अदालत ने कहा कि पुलिस जिन कारणों का हवाला देकर अनुमति देने से इनकार कर रही है, उनमें से कई कारणों को पहले ही न्यायिक स्तर पर खारिज किया जा चुका है, और कोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी संगठन के शांतिपूर्ण कार्यक्रम को रोकने के लिए ठोस और कानूनी आधार होना आवश्यक है।
पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था को बताया था कारण
RSS की ओर से मार्च निकालने के लिए अलग-अलग तारीखों पर आवेदन दिए गए थे। पुलिस ने अन्य समुदायों के धार्मिक स्थलों, सामाजिक सुधारकों की मूर्तियों, यातायात व्यवस्था, लाउडस्पीकर के इस्तेमाल और कानून-व्यवस्था बिगड़ने की आशंका जैसे कारणों का उल्लेख किया था।
हालांकि, हाई कोर्ट ने इन आपत्तियों को अनुमति रोकने के लिए पर्याप्त नहीं माना। अदालत ने कहा कि ऐसे कारणों पर पहले भी विचार किया जा चुका है।
पुराने फैसलों का भी दिया हवाला
यह मामला RSS के उत्तर तमिलनाडु सचिव वी.जी. जगदीशन की याचिका पर सुनवाई के दौरान सामने आया। याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ वकील एन.एल. राजा ने पुलिस के आदेशों को चुनौती दी थी। सुनवाई के दौरान अदालत ने अपने पुराने फैसलों का भी उल्लेख किया। कोर्ट ने कहा कि RSS वर्ष 2022 से रूट मार्च की अनुमति के लिए अदालत का दरवाजा खटखटा रहा है।
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि RSS को रूट मार्च निकालने का अधिकार है, लेकिन सार्वजनिक सुरक्षा और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए उचित कानूनी प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं।
सार्वजनिक सड़कों के इस्तेमाल पर भी टिप्पणी
हाई कोर्ट ने वर्ष 2023 के एक आदेश का उल्लेख करते हुए कहा कि सार्वजनिक सड़कें किसी एक धर्म, जाति या समुदाय की संपत्ति नहीं हैं। इनका इस्तेमाल सभी नागरिक कानून के दायरे में रहकर कर सकते हैं।
अदालत की इस टिप्पणी को शांतिपूर्ण सार्वजनिक आयोजनों के अधिकार और प्रशासन की जिम्मेदारियों के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था पर रहेगी नजर
हाई कोर्ट से अनुमति मिलने के बाद RSS के प्रस्तावित रूट मार्च के आयोजन का रास्ता साफ हो गया है। अब पुलिस और स्थानीय प्रशासन के सामने निर्धारित मार्गों पर यातायात, सुरक्षा और कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी होगी।
इस फैसले के बाद तमिलनाडु में सार्वजनिक कार्यक्रमों की अनुमति को लेकर प्रशासनिक प्रक्रिया भी चर्चा में आ गई है। अदालत ने अपने आदेश के जरिए स्पष्ट किया है कि सुरक्षा संबंधी चिंताओं पर विचार करना जरूरी है, लेकिन किसी आयोजन पर रोक लगाने के लिए पर्याप्त कानूनी आधार होना चाहिए।

