नई दिल्ली: केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले ने शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे के सरकार बदलने संबंधी बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि भारत एक लोकतांत्रिक देश है और यहां सरकार बदलने का फैसला किसी एक नेता की इच्छा से नहीं, बल्कि जनता के वोट से होता है। अगर उद्धव ठाकरे सत्ता परिवर्तन चाहते हैं तो उन्हें 2029 के लोकसभा चुनाव का इंतजार करना चाहिए। जनता ही तय करेगी कि देश की सत्ता किसके हाथ में होगी।
अठावले ने कहा कि भारत का लोकतंत्र संविधान के आधार पर चलता है। यहां करोड़ों मतदाता अपने मताधिकार का इस्तेमाल करके सरकार चुनते हैं। इसलिए किसी भी राजनीतिक दल या नेता को सत्ता परिवर्तन की बात करते समय लोकतांत्रिक प्रक्रिया का सम्मान करना चाहिए।
2029 के चुनाव में जनता देगी जवाब
रामदास अठावले ने उद्धव ठाकरे पर निशाना साधते हुए कहा कि अगर वे बदलाव चाहते हैं तो 2029 के चुनाव में अपनी कोशिश कर सकते हैं। लेकिन यह फैसला केवल उनके हाथ में नहीं है। देश की जनता अपने वोट से तय करती है कि किसे सरकार चलाने का मौका मिलेगा।
उन्होंने कहा कि भारत की तुलना बांग्लादेश, नेपाल या श्रीलंका से नहीं की जा सकती। हमारा देश डॉ. भीमराव आंबेडकर द्वारा बनाए गए संविधान के अनुसार चलता है। यहां सत्ता परिवर्तन का रास्ता चुनाव है और लोकतांत्रिक व्यवस्था के तहत ही सरकार का गठन होता है।
कोलकाता भगदड़ पर भी विपक्ष को घेरा
केंद्रीय मंत्री ने कोलकाता में दुर्गा पूजा पंडाल में हुई भगदड़ को लेकर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने तृणमूल कांग्रेस के नेताओं पर हादसे को राजनीतिक मुद्दा बनाने का आरोप लगाया।
अठावले ने कहा कि आजकल विपक्ष हर घटना को राजनीति से जोड़ने की कोशिश करता है। किसी दुर्घटना के लिए केंद्र की एनडीए सरकार को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में हुई भगदड़ के वास्तविक कारणों की जांच होनी चाहिए, न कि बिना तथ्यों के राजनीतिक आरोप लगाए जाने चाहिए।
यह भी पढ़ें: फ्रांस में महंगाई के खिलाफ भड़का गुस्सा, सड़कों पर लाखों लोग, ऐतिहासिक टाउन हॉल में आग
हादसों पर राजनीति के बजाय जांच जरूरी
रामदास अठावले ने कहा कि देश में पहले भी दुर्घटनाएं होती रही हैं। ऐसे मामलों में सबसे जरूरी है कि हादसे के कारणों का पता लगाया जाए और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए उचित कदम उठाए जाएं।
उन्होंने तृणमूल कांग्रेस के नेताओं की आलोचना करते हुए कहा कि हर घटना के लिए राजनीतिक विरोधियों को जिम्मेदार ठहराने से समस्या का समाधान नहीं होगा। प्रशासनिक कमियों की पहचान करना और जिम्मेदारी तय करना ज्यादा जरूरी है।
केंद्रीय मंत्री के बयान से एक बार फिर सत्ता परिवर्तन, लोकतांत्रिक व्यवस्था और विपक्ष की भूमिका को लेकर राजनीतिक चर्चा शुरू हो गई है। अब देखना होगा कि उद्धव ठाकरे और उनकी पार्टी इस बयान पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं।

