भोपाल: मध्यप्रदेश के डिंडौरी में स्वास्थ्य विभाग की सरकारी राशि के कथित गबन और अनियमित भुगतान के मामले में आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) ने छह अधिकारियों-कर्मचारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। मामला 60.60 लाख रुपये की कथित वित्तीय गड़बड़ी से जुड़ा है। आरोप है कि एरियर के दोहरे भुगतान, बिना वैध आदेश भत्ते देने और भुगतान संबंधी प्रविष्टियों में हेरफेर से सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचाया गया।
ईओडब्ल्यू की जांच में एक अप्रैल 2016 से 31 दिसंबर 2025 के बीच डिंडौरी के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) कार्यालय की लेखा शाखा में हुए भुगतानों में अनियमितताएं सामने आई हैं। जांच एजेंसी के मुताबिक, कुछ भुगतानों के समर्थन में जरूरी कार्यालयीन रिकॉर्ड और वैधानिक आदेश भी नहीं मिले।
एरियर के भुगतान में 49.89 लाख रुपये की गड़बड़ी
जांच के अनुसार, आईएफएमआईएस पोर्टल पर एरियर की गणना में अनियमितता कर 49.89 लाख रुपये का कथित अवैध भुगतान किया गया। आरोप है कि पहले मैन्युअल तरीके से भुगतान किए जा चुके एरियर की राशि की पोर्टल पर नकारात्मक प्रविष्टि का इस्तेमाल कर दोबारा भुगतान की स्थिति बनाई गई। ईओडब्ल्यू ने इसे कथित वित्तीय गड़बड़ी का प्रमुख हिस्सा बताया है।
बिना आदेश भत्ते दिए, 4.78 लाख का भुगतान भी जांच के दायरे में
ईओडब्ल्यू के मुताबिक, मद परिवर्तन कर नॉन प्रैक्टिसिंग अलाउंस (एनपीए) और गृह भत्ते के रूप में 5.89 लाख रुपये का अतिरिक्त भुगतान किया गया। इसके लिए वैधानिक आदेश नहीं होने का आरोप है।
जुलाई 2024 में लेखा शाखा के प्रभारी रहे सहायक ग्रेड-3 गुलाब प्रसाद साहू को आईएफएमआईएस पोर्टल की ‘आफ्टर जुलाई 2017 एरियर स्क्रीन’ के जरिए 4.78 लाख रुपये का भुगतान किए जाने की बात भी जांच में सामने आई। एजेंसी के अनुसार, इस भुगतान से जुड़े जरूरी कार्यालयीन आदेश और दस्तावेज उपलब्ध नहीं थे।
जांच में वेंडरों को भुगतान के दौरान दोहरी या गलत प्रविष्टियों की आशंका भी सामने आई है। आरोप है कि संबंधित अधिकारियों-कर्मचारियों ने बिलों को डिजिटल हस्ताक्षर से मंजूरी दी, जिसके बाद राशि लाभार्थियों या संदिग्ध बैंक खातों में स्थानांतरित हुई।
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तत्कालीन सीएमएचओ और डीएचओ समेत छह आरोपी
ईओडब्ल्यू ने तत्कालीन सीएमएचओ आरके मेहरा और रमेश सिंह मरावी, तत्कालीन जिला स्वास्थ्य अधिकारी (डीएचओ) बददेव सिंह भलावी और भरत सिंह टेकाम, सहायक ग्रेड-3 गुलाब प्रसाद साहू तथा सुपरवाइजर प्रकाश परस्ते को आरोपी बनाया है।
एजेंसी ने अपराध क्रमांक 109/2026 के तहत भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 7(सी), 13(1)(ए) और 13(2) तथा भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 316(5) और 61(2) के तहत मामला दर्ज किया है। ईओडब्ल्यू ने मामले की जांच शुरू कर दी है।

