नई दिल्ली: आने वाले दिनों में आम लोगों को चीनी के दामों में राहत मिल सकती है। बाजार में चीनी की सप्लाई बनी रहे, इसके लिए केंद्र सरकार ने 10 लाख टन कच्ची चीनी के ड्यूटी फ्री आयात की समयसीमा बढ़ा दी है। पहले ये सीमा 31 अक्टूबर तक थी, जिसे अब बढ़ाकर 31 दिसंबर कर दिया गया है। इससे चीनी मिलों और कारोबारियों को आयात के लिए ज्यादा समय मिल जाएगा।
विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) ने अधिसूचना जारी कर बताया है कि घरेलू उत्पादन और निर्यात में कमी के बीच बाजार में चीनी की कमी न हो, इसलिए ये फैसला लिया गया है।
10 लाख टन में से केवल 3 लाख टन चीनी का आयात
जानकारी के अनुसार, सरकार ने घरेलू बाजार में चीनी की कमी को देखते हुए 10 लाख टन कच्ची चीनी के शुल्क मुक्त आयात की अनुमति दी थी। हालांकि, अब तक करीब 3 लाख टन चीनी का ही आयात हो पाया है। यानी निर्धारित मात्रा में से लगभग 7 लाख टन चीनी का आयात अभी बाकी है।
आयात कम होने की एक बड़ी वजह घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजार की कीमतों में अंतर बताया जा रहा है। सरकार की ओर से कीमतों को नियंत्रित रखने के लिए उठाए गए कदमों के कारण आयातकों को पर्याप्त मुनाफा नहीं मिल पा रहा है। इसी वजह से कई कारोबारी और चीनी मिलें आयात करने से बच रही हैं।
क्या आम लोगों को मिलेगी सस्ती चीनी?
सरकार के इस फैसले के बाद बाजार में चीनी की उपलब्धता बढ़ने की उम्मीद है। यदि बची हुई 7 लाख टन चीनी का आयात पूरा होता है, तो घरेलू बाजार में सप्लाई बेहतर हो सकती है। इससे कीमतों में होने वाली बढ़ोतरी को रोकने में मदद मिलेगी।
हालांकि, चीनी के दाम तुरंत कम होंगे, यह कहना अभी जल्दबाजी होगी। कीमतों पर घरेलू उत्पादन, बाजार की मांग, अंतरराष्ट्रीय कीमतों और आयात की वास्तविक मात्रा का असर पड़ेगा। त्योहारों और शादी के सीजन में चीनी की मांग बढ़ने से भी बाजार की स्थिति प्रभावित हो सकती है।
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चीनी मिलों और कारोबारियों को राहत
ड्यूटी फ्री आयात की समयसीमा बढ़ने से चीनी मिलों और रिफाइनरियों को अंतरराष्ट्रीय बाजार के हिसाब से खरीदारी का ज्यादा मौका मिलेगा। कारोबारी अब दिसंबर के अंत तक आयात कर सकेंगे।
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्ची चीनी के दाम सही रहे तो आयात तेजी से होगा। इससे घरेलू बाजार में स्टॉक बढ़ेगा और सप्लाई बेहतर होगी। फिलहाल सरकार नहीं चाहती कि बाजार में चीनी की कमी हो और दाम बढ़ें। अब देखना होगा कि इस बढ़ी हुई समयसीमा में कारोबारी कितना आयात करते हैं और इसका खुदरा बाजार पर कितना असर पड़ता है।

