भोपाल: राजधानी मास्टर प्लान के नए ड्राफ्ट को लेकर ग्रामीण क्षेत्रों के किसानों ने विरोध शुरू कर दिया है।
किसानों का आरोप है कि प्रस्तावित प्लान में 66 गांवों की कृषि भूमि को रिवरफ्रंट, फॉरेस्ट, ग्रीन बेल्ट और अन्य आरक्षित श्रेणियों में शामिल करने से हजारों किसानों की खेती और आजीविका पर असर पड़ सकता है।
बड़ा तालाब के आसपास की कृषि भूमि का भू-उपयोग बदलने के प्रस्ताव पर आपत्ति जताते हुए किसानों ने मुगालिया छाप से पदयात्रा शुरू कर दी है। उन्होंने नगर तथा ग्राम निवेश (टीएंडसीपी) के संयुक्त संचालक कार्यालय पहुंचकर ज्ञापन देने का ऐलान किया है।
वहीं किसानों के पिछले आंदोलन को देखते हुए पुलिस ने उन्हें शहर से बाहर ही रोकने की तैयारी कर ली है। पुलिस ने नीलबड़ पर बेरिकेडिंग की है। यहां वज्र वाहन भी तैनात किया गया है। यहां वे लिखित आपत्तियां दर्ज कराएंगे।
किसानों की मांग है कि कृषि भूमि का लैंडयूज पहले की तरह कृषि ही रखा जाए और किसी भी बदलाव से पहले संबंधित गांवों में ग्रामसभाएं कराकर किसानों की सहमति ली जाए।
बड़ा तालाब के नाम पर कृषि भूमि का लैंड्यूज बदलने का आरोप
किसान अनोखी सिंह पटेल का कहना है कि बड़ा तालाब के संरक्षण के नाम पर ग्रामीण क्षेत्र की कृषि भूमि का भू-उपयोग बदला जा रहा है।
किसान इन जमीनों पर वर्षों से खेती कर रहे हैं और परिवारों की आजीविका इसी पर निर्भर है। उनका कहना है कि यदि जमीन आरक्षित श्रेणियों में शामिल हो गई, तो खेती और भविष्य में जमीन के उपयोग को लेकर अनिश्चितता बढ़ेगी।
1995 के मास्टर प्लान में कृषि उपयोग का प्रावधान
किसानों के मुताबिक, वर्ष 1995 के मास्टर प्लान में इन जमीनों का लैंडयूज कृषि था। बाद में तैयार किए गए वर्ष 2031 के मास्टर प्लान के ड्राफ्ट में भी कृषि उपयोग का प्रावधान रखा गया था। हालांकि, वह मास्टर प्लान निरस्त हो गया।
किसान भविष्य को लेकर चिंतित
किसानों का आरोप है कि मौजूदा ड्राफ्ट में बड़ा तालाब के आसपास की कृषि भूमि के भू-उपयोग में बदलाव का प्रस्ताव किया गया है। इसी वजह से किसान अपनी जमीन के भविष्य को लेकर चिंतित हैं।
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BIZ-1 और BIZ-2 जोन हटाने की मांग
किसान चाहते हैं कि उनकी कृषि भूमि का उपयोग खेती के लिए ही सुरक्षित रखा जाए। अनोखी सिंह पटेल के मुताबिक, किसानों के पास आजीविका का प्रमुख साधन खेती है। इसलिए उन्होंने भोजताल संरक्षण जोन-1 (BIZ-1) और जोन-2 (BIZ-2) को हटाने और कृषि भूमि का लैंडयूज कृषि ही रखने की मांग की है।

