वॉशिंगटन: अमेरिका और ईरान के बीच जारी सैन्य संघर्ष को लेकर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मुश्किलें बढ़ती दिखाई दे रही हैं। अब उनके परिवार के भीतर भी इस युद्ध को लेकर अलग राय सामने आई है। अमेरिकी राष्ट्रपति के बड़े बेटे डोनाल्ड ट्रंप जूनियर ईरान के साथ युद्ध के पक्ष में नहीं हैं। अमेरिकी पत्रिका ‘द अटलांटिक’ की रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने कई बार अपने पिता से निजी बातचीत में इस संघर्ष को लेकर चिंता जताई है।
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि डोनाल्ड ट्रंप जूनियर नहीं चाहते कि अमेरिका मध्य पूर्व के किसी नए युद्ध में उलझे। हालांकि उन्होंने अब तक सार्वजनिक रूप से अपने पिता की युद्ध संबंधी नीतियों का विरोध नहीं किया है।
चुनाव प्रचार के दौरान भी युद्ध से बचने की दी थी सलाह
साल 2024 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव प्रचार के दौरान भी डोनाल्ड ट्रंप जूनियर ने अपने पिता को मध्य पूर्व में किसी नए सैन्य संघर्ष से दूर रहने की सलाह दी थी। उनका मानना था कि अमेरिका को अपनी घरेलू समस्याओं और राष्ट्रीय हितों पर अधिक ध्यान देना चाहिए।
उसी वर्ष ईरान की ओर से इजराइल पर मिसाइल हमला किए जाने के बाद डॉन जूनियर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपने पिता की नेतृत्व क्षमता की तारीफ की थी। उन्होंने कहा था कि ट्रंप की ताकत और दृढ़ संकल्प अमेरिका को बड़े युद्ध से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
लेकिन अब परिस्थितियां बदल गई हैं। अमेरिका के ईरान के साथ सैन्य संघर्ष में शामिल होने के बाद डॉन जूनियर ने कथित तौर पर अपने पिता के सामने इस फैसले को लेकर असहमति जताई है।
सार्वजनिक रूप से पिता के खिलाफ बोलने से बच रहे डॉन जूनियर
द अटलांटिक की रिपोर्ट के मुताबिक, डोनाल्ड ट्रंप जूनियर ने युद्ध को लेकर अपनी चिंताएं निजी बातचीत तक ही सीमित रखी हैं। वह सार्वजनिक मंच पर राष्ट्रपति ट्रंप से अलग रुख अपनाने से बच रहे हैं।
डॉन जूनियर दिवंगत अमेरिकी राजनीतिक कार्यकर्ता चार्ली कर्क के करीबी रहे थे। कर्क भी अमेरिका के विदेशी युद्धों में शामिल होने के विरोधी थे।
ईरान के साथ संघर्ष को लेकर ट्रंप समर्थक ‘मेक अमेरिका ग्रेट अगेन’ यानी MAGA समूह के भीतर भी अलग-अलग विचार सामने आए हैं। एक वर्ग सैन्य कार्रवाई का समर्थन कर रहा है, जबकि दूसरा वर्ग मानता है कि विदेशी युद्धों में अमेरिका की भागीदारी उसकी घरेलू प्राथमिकताओं को प्रभावित कर सकती है।
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जेडी वेंस सहित कई अधिकारियों ने भी उठाए सवाल?
रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस समेत प्रशासन के कुछ वरिष्ठ अधिकारियों ने भी ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई को लेकर निजी तौर पर आशंकाएं जताई थीं। बताया गया है कि फरवरी में इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की ओर से रखे गए शुरुआती प्रस्ताव पर अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो और सीआईए निदेशक जॉन रैटक्लिफ ने भी सवाल उठाए थे।
इन अधिकारियों की चिंता इस बात को लेकर थी कि क्या केवल हवाई हमलों के जरिए ईरान में सत्ता परिवर्तन जैसे बड़े लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है।
ईरान के साथ जारी संघर्ष ने अमेरिकी प्रशासन और ट्रंप समर्थकों के बीच विदेश नीति को लेकर मतभेद सामने ला दिए हैं। हालांकि डोनाल्ड ट्रंप जूनियर की कथित असहमति अभी निजी बातचीत पर आधारित रिपोर्ट तक सीमित है। ऐसे में यह स्पष्ट नहीं है कि उनके विचार राष्ट्रपति ट्रंप की आगे की रणनीति पर कितना असर डालेंगे।

