Friday, November 6, 2026
Contact: +91 97559 93555
Email: tathyawani@gmail.com
spot_img
Hometrending newsबीना में 50 हजार करोड़ से बनेगी पेट्रोकेमिकल इंडस्ट्री, सालाना 22 लाख...

बीना में 50 हजार करोड़ से बनेगी पेट्रोकेमिकल इंडस्ट्री, सालाना 22 लाख टन उत्पादन का लक्ष्य

मुंबई/भोपाल: मध्यप्रदेश में पेट्रोकेमिकल उद्योग को विस्तार देने के लिए बीना में 50 हजार करोड़ रुपये की लागत से डाउनस्ट्रीम पेट्रोकेमिकल परियोजना विकसित की जाएगी। इस परियोजना से हर साल 22 लाख टन से अधिक पेट्रोकेमिकल उत्पाद तैयार करने का लक्ष्य है। इससे प्लास्टिक, पैकेजिंग, फार्मा, टेक्सटाइल और ऑटोमोबाइल जैसे उद्योगों को कच्चा माल उपलब्ध कराने के साथ रोजगार के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गुरुवार को मुंबई के बॉम्बे एग्जिबिशन सेंटर में आयोजित इंडिया केम-2026 के उद्घाटन सत्र में यह जानकारी दी। karyakram me केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा रसायन एवं उर्वरक मंत्री जगत प्रकाश नड्डा, केंद्रीय राज्यमंत्री अनुप्रिया पटेल aour महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस bhi moujod the. डॉ. मोहन यादव कहा कि मध्यप्रदेश निवेशकों के लिए अनुकूल वातावरण तैयार कर रहा है। बिजली, पानी, जमीन और औद्योगिक सुविधाओं की उपलब्धता के कारण प्रदेश में रसायन एवं पेट्रोकेमिकल उद्योगों के विस्तार की व्यापक संभावनाएं हैं।

मुख्यमंत्री ने बताया कि ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के बाद प्रदेश में करीब 12 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्तावों को धरातल पर उतारने की दिशा में काम आगे बढ़ा है। सरकार का प्रयास है कि निवेश प्रस्तावों को वास्तविक औद्योगिक इकाइयों में बदला जाए, ताकि प्रदेश में उत्पादन और रोजगार दोनों को गति मिल सके।

बीना, विजयपुर और आष्टा में बढ़ेंगी औद्योगिक गतिविधियां

डॉ. यादव ने कहा कि बीना की पेट्रोकेमिकल परियोजना के साथ विजयपुर में गेल का गैस प्रसंस्करण ढांचा और सीहोर जिले के आष्टा में गेल इंडिया की पेट्रोकेमिकल परियोजना भी औद्योगिक विकास को गति दे सकती हैं। इन परियोजनाओं से पेट्रोकेमिकल उत्पादों पर आधारित उद्योगों के लिए नए अवसर तैयार होंगे।

उन्होंने बताया कि रायसेन जिले के तामोट में 121 एकड़ और ग्वालियर जिले के बिलोवा में 93 एकड़ क्षेत्र में प्लास्टिक पार्क विकसित किए गए हैं। इन पार्कों का उद्देश्य प्लास्टिक और पॉलिमर आधारित छोटे तथा मध्यम उद्योगों को बढ़ावा देना है। मुख्यमंत्री ने पीएम मित्रा पार्क का उल्लेख करते हुए कहा कि इससे प्रदेश में कपड़ा उद्योग के विस्तार और निवेश की संभावनाएं मजबूत हुई हैं।

मुख्यमंत्री के मुताबिक, राज्य सरकार उद्योगों की स्थापना के लिए सरल और पारदर्शी व्यवस्था बनाने पर जोर दे रही है। निवेशकों को जरूरी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ भूमि, बिजली और पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करने की दिशा में काम किया जा रहा है।

2040 तक एक ट्रिलियन डॉलर का उद्योग बनाने का लक्ष्य

मुख्यमंत्री ने भारत के रसायन एवं पेट्रोकेमिकल क्षेत्र की बढ़ती क्षमता का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्ष 2014 में इस क्षेत्र का बाजार करीब 120 अरब डॉलर का था, जो अब दोगुने से अधिक हो चुका है। उन्होंने वर्ष 2014 से 2026 के बीच इस क्षेत्र में करीब एक लाख करोड़ रुपये का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश आने की बात भी कही।

डॉ. यादव ने कहा कि वैश्विक तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और आपूर्ति शृंखला में व्यवधान के बीच भारत के सामने औद्योगिक विकास के नए अवसर हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में वर्ष 2040 तक देश के रसायन एवं पेट्रोकेमिकल क्षेत्र को एक ट्रिलियन डॉलर का उद्योग बनाने का लक्ष्य रखा गया है। मध्यप्रदेश इस लक्ष्य को हासिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए तैयार है।

यह भी पढ़ें: स्टार्टअप शुरू करने वालों को यूपी सरकार की बड़ी सौगात, अब हर महीने मिलेंगे 20 हजार रुपए, आर्थिक मदद भी बढ़ी

अनुप्रिया पटेल ने सुरक्षा और गुणवत्ता पर दिया जोर

केंद्रीय राज्यमंत्री अनुप्रिया पटेल ने रसायन उद्योग में सुरक्षा, गुणवत्ता और कारोबार को आसान बनाने से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि विकसित भारत-2047 की कार्ययोजना के तहत दुर्घटना की आशंका वाली प्रमुख औद्योगिक इकाइयों में खतरनाक रसायनों के सुरक्षित संचालन के लिए कर्मचारियों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि पांच साल में करीब 3,000 ऐसी इकाइयों को प्रशिक्षण कार्यक्रम के दायरे में लाने का लक्ष्य है। अब तक 26 प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से लगभग 2,500 कर्मचारियों को प्रशिक्षित किया जा चुका है।

पटेल ने रसायनों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए लागू किए जा रहे गुणवत्ता नियंत्रण आदेशों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इन आदेशों को लागू करते समय डाउनस्ट्रीम उद्योगों और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों पर पड़ने वाले प्रभाव को ध्यान में रखना जरूरी है। उनके मुताबिक, विभाग ने 38 गुणवत्ता नियंत्रण आदेश वापस लिए हैं और भारतीय मानक ब्यूरो के मानकों को अनिवार्य बनाने के लिए 37 आदेश जारी किए हैं।

उन्होंने खतरनाक कचरे के निपटान और गहरे समुद्र में अपशिष्ट छोड़ने से जुड़े नियमों पर उद्योग की चिंताओं का भी उल्लेख किया। इन मुद्दों के समाधान के लिए संबंधित मंत्रालयों के साथ बातचीत की जा रही है।

फडणवीस बोले- निवेश के लिए राज्यों में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि देश के विभिन्न राज्यों के बीच निवेश आकर्षित करने के लिए स्वस्थ प्रतिस्पर्धा हो रही है। हर राज्य अधिक निवेश लाकर औद्योगिक विकास और रोजगार सृजन में योगदान देना चाहता है।

उन्होंने बताया कि महाराष्ट्र में करीब 3,600 रसायन उद्योग काम कर रहे हैं। देश के रसायन क्षेत्र के सकल मूल्यवर्धन में महाराष्ट्र की हिस्सेदारी 19 प्रतिशत और रसायन क्षेत्र के निर्यात में 17 प्रतिशत है। इस उद्योग से राज्य में करीब तीन लाख लोगों को रोजगार मिल रहा है।

फडणवीस ने कहा कि सही नीतियों के माध्यम से इस क्षेत्र में रोजगार दोगुना और निवेश तीन गुना करने की संभावनाएं हैं। महाराष्ट्र सरकार रसायन उद्योग के लिए अलग नीति तैयार कर रही है, जिसे नवंबर के पहले सप्ताह में जारी किए जाने की उम्मीद है। राज्य सरकार वाढवण बंदरगाह के आसपास 2,500 से 5,000 एकड़ जमीन पर बड़ा रसायन उद्योग क्षेत्र विकसित करने की दिशा में भी काम करना चाहती है।

उन्होंने मेथनॉल और एसिटिक एसिड जैसे रसायनों के आयात पर निर्भरता घटाने तथा दवा निर्माण में इस्तेमाल होने वाले सक्रिय औषधीय घटकों का घरेलू उत्पादन बढ़ाने की जरूरत बताई। उनके अनुसार, वैश्विक आपूर्ति शृंखला में आने वाली बाधाएं भारत के लिए नए उत्पादन केंद्र विकसित करने का अवसर भी हैं।

नड्डा की मौजूदगी में शुरू हुआ 14वां इंडिया केम

केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा रसायन एवं उर्वरक मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने इंडिया केम-2026 के उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में हिस्सा लिया। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और केंद्रीय राज्यमंत्री अनुप्रिया पटेल सहित उद्योग जगत के प्रतिनिधि मौजूद रहे।

तीन दिवसीय आयोजन के 14वें संस्करण में रसायन, पेट्रोकेमिकल, पॉलिमर और कृषि रसायन उद्योगों से जुड़े देश-विदेश के प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं। सम्मेलन में निवेश, नई तकनीक, नवाचार, गुणवत्ता, औद्योगिक सुरक्षा और वैश्विक साझेदारी की संभावनाओं पर चर्चा की जा रही है। इस दौरान ‘केमिकल फ्रेटरनिटी रिपोर्ट’ पुस्तिका और फिक्की तथा ईवाई की ओर से तैयार ज्ञान पत्र का विमोचन भी किया गया।

RELATED ARTICLES

ई-पेपर

1 to 7 November 2026
25 to 31 October 2026

शासकीय निविदाएं

विज्ञापन