नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली की रेस कोर्स मस्जिद के पास शुक्रवार को उस समय हलचल बढ़ गई, जब पुलिस ने इलाके में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 लागू होने की जानकारी देने वाला नोटिस बोर्ड लगा दिया। नोटिस में पांच या उससे अधिक लोगों के एक स्थान पर इकट्ठा होने और किसी भी तरह के धरना-प्रदर्शन पर रोक की बात कही गई थी।
पुलिस ने दी कानूनी कार्रवाई की चेतावनी
पुलिस की ओर से लगाए गए नोटिस में साफ कहा गया था कि प्रतिबंधों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। यह नोटिस नई दिल्ली के पुलिस उपायुक्त की ओर से लगाया गया था।
हालांकि, नोटिस लगाए जाने के कुछ ही मिनट बाद पुलिस ने मस्जिद में नमाज पढ़ने पहुंचे लोगों को अनुमति दे दी। इसके बाद नमाजी मस्जिद के अंदर पहुंचे और नमाज अदा करने की तैयारी करने लगे।
नमाजियों ने प्रशासन के फैसले का किया स्वागत
नमाज पढ़ने की अनुमति मिलने पर वहां मौजूद लोगों ने खुशी जताई और प्रशासन के फैसले का स्वागत किया। लोगों का कहना था कि मस्जिद हो या मंदिर, हर व्यक्ति को अपने धर्म के अनुसार शांतिपूर्ण तरीके से पूजा और प्रार्थना करने का अधिकार मिलना चाहिए।
नमाजियों ने कहा कि प्रशासन की ओर से नमाज की अनुमति देना अच्छी बात है। इससे लोगों को राहत मिली है। उनका मानना था कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के साथ धार्मिक गतिविधियों का सम्मान भी जरूरी है।
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नोटिस के बाद अनुमति मिलने से चर्चा तेज
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे ज्यादा चर्चा इस बात की रही कि पुलिस ने पहले इलाके में लोगों के एकत्र होने पर प्रतिबंध का नोटिस लगाया और कुछ ही मिनट बाद नमाज पढ़ने की अनुमति दे दी।
हालांकि, प्रशासन की ओर से अनुमति किन शर्तों पर दी गई, इसकी विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है। फिलहाल नमाजियों ने पुलिस के फैसले पर संतोष जताया है। इस घटना ने एक बार फिर कानून-व्यवस्था और धार्मिक स्वतंत्रता के बीच संतुलन बनाए रखने के मुद्दे को चर्चा में ला दिया है।

