भोपाल: मध्यप्रदेश में मत्स्य पालन को उद्योग का दर्जा देकर खाद्य प्रसंस्करण और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) क्षेत्र से जोड़ा जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भोपाल में आयोजित राष्ट्रीय मत्स्य सम्मेलन में ऐलान किया कि इस क्षेत्र को अन्य उद्योगों की तरह छूट और प्रोत्साहन दिए जाएंगे। कार्यक्रम में केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह भी मौजूद रहे। सरकार का लक्ष्य मछली उत्पादन बढ़ाने के साथ प्रसंस्करण, भंडारण और निर्यात की व्यवस्था मजबूत करना है। प्रदेश की एकीकृत मत्स्योद्योग नीति के तहत करीब 40 हजार करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव मिले हैं। इनसे लगभग 3.5 लाख प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार व स्वरोजगार के अवसर बनने का अनुमान है।
कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में मुख्यमंत्री ने ‘मध्यप्रदेश मत्स्य निवेश एवं निर्यात मार्गदर्शिका’ का विमोचन किया। इसका उद्देश्य निजी निवेश आकर्षित करने और मत्स्य उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देना है।
चार जलाशयों में 7,430 करोड़ रुपये का निवेश
प्रदेश के इंदिरा सागर, बरगी, बाणसागर और बारना जलाशयों में आधुनिक केज कल्चर और संबंधित सुविधाएं विकसित करने की योजना है। इसके लिए 7,430 करोड़ रुपये के निवेश का उल्लेख किया गया है। परियोजना से करीब चार लाख मीट्रिक टन अतिरिक्त मछली उत्पादन का लक्ष्य है। केज कल्चर में जलाशयों के भीतर जाल से बने पिंजरों में नियंत्रित तरीके से मछलियां पाली जाती हैं।
तीन साल में उत्पादन दोगुना करने का लक्ष्य
मध्यप्रदेश में मत्स्य पालन के लिए करीब 4.50 लाख हेक्टेयर जलक्षेत्र उपलब्ध है। वर्ष 2025-26 में प्रदेश में 4.95 लाख मीट्रिक टन से अधिक मछली उत्पादन हुआ, जिसे अब तक का सर्वाधिक बताया गया है। मत्स्योद्योग नीति-2026 के तहत जलाशयों में करीब एक लाख केज स्थापित करने और अगले तीन वर्षों में उत्पादन दोगुना करने का लक्ष्य रखा गया है।
हलाली और इंदिरा सागर बनेंगे मॉडल
केंद्र सरकार ने प्रदेश को रिजर्वायर फिशरीज क्लस्टर कार्यक्रम में शामिल किया है। इसके तहत रायसेन के हलाली और खंडवा के इंदिरा सागर जलाशय को मॉडल के रूप में विकसित किया जा रहा है। यहां मछली के बीज और चारे से लेकर प्रसंस्करण, शीत भंडारण, परिवहन और विपणन तक की सुविधाएं विकसित की जाएंगी।
एकीकृत मत्स्य पालन के तहत मछली के साथ मोती उत्पादन, मखाना, सिंघाड़ा, कमल, बतख और कुक्कुट पालन को भी बढ़ावा दिया जाएगा। एक्वापोनिक्स और हाइड्रोपोनिक्स तकनीकों से सब्जियों व अन्य उत्पादों का उत्पादन बढ़ाने की योजना है।
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भारत मछली उत्पादन में दुनिया में दूसरे स्थान पर
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रदेश में पर्याप्त जल संसाधन और बढ़ती सिंचाई क्षमता मत्स्य पालन के विस्तार के लिए अवसर प्रदान करती है। वहीं, केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह ने बताया कि भारत का मछली उत्पादन 95 लाख टन से बढ़कर 198 लाख टन हो गया है। मत्स्य निर्यात भी 30,213 करोड़ रुपये से बढ़कर 62,408 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र से करीब छह करोड़ लोगों की आजीविका जुड़ी है।
केंद्रीय राज्य मंत्री एसपी सिंह बघेल ने बताया कि देश के मत्स्य उत्पादन में अंतर्देशीय मत्स्य पालन का योगदान करीब 75 प्रतिशत है। सरकार को उम्मीद है कि निवेश, आधुनिक तकनीक और निर्यात सुविधाओं के विस्तार से मध्यप्रदेश में मत्स्य पालन ग्रामीण रोजगार और अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण माध्यम बनेगा।

