बालाघाट: मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले में स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए राज्य सरकार ने 67 बॉन्डेड मेडिकल ऑफिसर उपलब्ध कराए हैं। इन डॉक्टरों को जिले के अलग-अलग क्षेत्रों में तैनात किया गया है। इससे स्वास्थ्य सेवाओं में कुछ सुधार होने की उम्मीद है, लेकिन जिले के कई विकासखंडों में विशेषज्ञ चिकित्सकों और मेडिकल स्टाफ की कमी अब भी बनी हुई है।
खासकर बैहर, बिरसा और परसवाड़ा विकासखंड में स्वास्थ्य विभाग के बड़ी संख्या में पद खाली हैं। इन क्षेत्रों में विशेषज्ञ डॉक्टरों के सभी स्वीकृत पद रिक्त होने से मरीजों को इलाज के लिए परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। वहीं नर्सिंग ऑफिसर और पैरामेडिकल कर्मचारियों की कमी भी स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए चुनौती बनी हुई है।
बैहर में विशेषज्ञ डॉक्टरों के सभी पांच पद खाली
बैगा बहुल बैहर विकासखंड में विशेषज्ञ चिकित्सकों के पांच पद स्वीकृत हैं, लेकिन वर्तमान में सभी पद खाली हैं। यहां मेडिकल ऑफिसर के 11 पदों में से 9 भरे गए हैं, जबकि 2 पद अब भी रिक्त हैं।
नर्सिंग ऑफिसर के 19 स्वीकृत पदों में से 18 पर कर्मचारी कार्यरत हैं और एक पद खाली है। सबसे ज्यादा कमी पैरामेडिकल स्टाफ की है। यहां 26 स्वीकृत पदों में से केवल 7 भरे हुए हैं, जबकि 19 पद खाली पड़े हैं।
बिरसा और परसवाड़ा में भी कर्मचारियों की कमी
बैगा बहुल बिरसा विकासखंड में विशेषज्ञ चिकित्सकों के तीनों पद खाली हैं। मेडिकल ऑफिसर के 9 पदों में से 7 भरे हुए हैं और 2 पद रिक्त हैं। नर्सिंग ऑफिसर के 11 पदों में से 9 पर कर्मचारी कार्यरत हैं, जबकि 2 पद खाली हैं। यहां पैरामेडिकल स्टाफ के 19 स्वीकृत पदों में से केवल 7 भरे गए हैं और 12 पद रिक्त हैं।
इसी तरह परसवाड़ा विकासखंड में विशेषज्ञ डॉक्टरों के तीनों पद खाली हैं। मेडिकल ऑफिसर के 9 पदों में से 7 भरे हुए हैं और 2 पद रिक्त हैं। नर्सिंग ऑफिसर के 17 पदों में से 16 भरे हुए हैं, जबकि एक पद खाली है। परसवाड़ा में पैरामेडिकल स्टाफ की स्थिति भी चिंताजनक है। यहां 19 पदों में से केवल 3 पर कर्मचारी कार्यरत हैं और 16 पद खाली हैं।
तीनों विकासखंडों में विशेषज्ञ डॉक्टरों के सभी 11 पद रिक्त
स्वास्थ्य विभाग के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार बैहर, बिरसा और परसवाड़ा विकासखंड में विशेषज्ञ चिकित्सकों के कुल 11 पद स्वीकृत हैं, लेकिन एक भी पद भरा नहीं गया है। वहीं मेडिकल ऑफिसर के कुल 29 पदों में से 23 भरे हुए हैं और 6 पद खाली हैं। नर्सिंग ऑफिसर के 47 पदों में से 43 भरे हुए हैं, जबकि 4 पद रिक्त हैं।
सबसे अधिक कमी पैरामेडिकल स्टाफ की है। तीनों विकासखंडों में कुल 64 पद स्वीकृत हैं, जिनमें केवल 17 कर्मचारी कार्यरत हैं और 47 पद खाली पड़े हैं। इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि स्वास्थ्य विभाग में कर्मचारियों की कमी दूर करने के लिए अभी काफी काम किए जाने की जरूरत है।
यह भी पढ़ें: कांग्रेस आंदोलनों की आड़ में देश में अराजकता फैलाने की कोशिश कर रही है: भाजपा संगठन महामंत्री चंद्रशेखर
शासन को भेजा पत्र, पद भरने का इंतजार
जिले में स्वास्थ्य कर्मचारियों की कमी को देखते हुए जिला प्रशासन ने रिक्त पदों की पूर्ति के लिए राज्य शासन को पत्र भेजा है। हालांकि उपलब्ध जानकारी के अनुसार अब तक इन पदों को भरने की दिशा में कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई है। ग्रामीण और आदिवासी बहुल क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता बेहद जरूरी है। विशेषज्ञ डॉक्टरों और पैरामेडिकल कर्मचारियों की कमी के कारण स्थानीय स्तर पर मरीजों को समय पर इलाज मिलने में परेशानी हो सकती है।
ऐसे में जरूरत है कि शासन रिक्त पदों पर जल्द नियुक्तियां करे, ताकि बैहर, बिरसा और परसवाड़ा के लोगों को अपने क्षेत्र में ही बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकें।

