भोपाल: रविवार की सुबह वन विहार का चीकू द्वार कविताओं से गुलजार रहा। छतनारा समूह की 80वीं पोएट्स वॉक में 30 से ज्यादा कवि और कविता प्रेमी जुटे।वन विहार से शुरू हुई वॉक सैरसपाटा के पास झील किनारे काव्य गोष्ठी में बदली। युवा शायर मनन दीक्षित ने संचालन किया और शायर अभय शुक्ला की ग़ज़लों से महफिल की शुरुआत हुई।
अमित गांगले की गज़लों पर खूब वाहवाही मिली, राघव और अखिलेश लोधी ने हिंदी कविताएं सुनाईं। देवेंद्र जेठवानी की हास्य रचनाओं ने खूब हंसाया, तो सुहास मिश्रा, शर्मिला खान और आनंद कृष्ण की प्रस्तुतियों ने मन मोह लिया।पोएट्स वॉक छतनारा की नियमित गतिविधि है, जहां प्रकृति के बीच कविता पाठ और संवाद होता है। इस बार विश्व कविता और अनुवाद की प्रक्रिया पर भी चर्चा हुई। स्कूली छात्रों से लेकर वरिष्ठ नागरिकों तक ने इसमें उत्साह से हिस्सा लिया।
वरिष्ठ नागरिकों ने भी सुनाईं कविताएं
आयोजन में उम्र और अनुभव की विविधता भी देखने को मिली। 64 वर्षीय गुरमीत सिंह ने अपनी हिंदी कविताएं सुनाईं, जबकि 72 वर्षीय सीता सिन्हा ने अपनी दशकों पुरानी डायरी से कविताएं साझा कीं। वरिष्ठ नागरिकों की प्रस्तुतियों ने आयोजन को विशेष बना दिया।
मनन दीक्षित ने अपनी गजलें भी सुनाईं। उन्होंने सभी प्रतिभागियों और श्रोताओं का आभार जताते हुए छतनारा की निशुल्क लाइब्रेरी में आकर साहित्य पढ़ने का आग्रह किया।
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कविताओं में प्रेम, सौंदर्य और जीवन की चिंता
गोष्ठी में प्रस्तुत रचनाओं ने विविध भावों को स्वर दिया। मनन दीक्षित के शेरों में हिंदी और उर्दू को समान महत्व देने का संदेश दिखाई दिया। अभिनव सोनी की कविता में फूलों के माध्यम से जीवन की सुंदरता और प्रकृति के सौंदर्य को रेखांकित किया गया। वहीं दीपक रघुवंशी की गजल में प्रेम, आत्मबोध और अपने हिस्से के संसार को खो देने की पीड़ा उभरी।
छतनारा समूह की 80वीं पोएट्स वॉक ने एक बार फिर यह रेखांकित किया कि कविता केवल मंच तक सीमित कला नहीं, बल्कि अलग-अलग पीढ़ियों को जोड़ने और संवेदनाओं को साझा करने का माध्यम भी है।

