चेन्नई: मशहूर शेफ, शिक्षाविद और टेलीविजन हस्ती डॉ. के. दामोदरन, जिन्हें शेफ दामू के नाम से जाना जाता था, का 25 अक्टूबर 2026 को चेन्नई में निधन हो गया। वे 72 वर्ष के थे। बताया जा रहा है कि वे कुछ समय से अस्वस्थ चल रहे थे। उनके निधन पर शेफ वेंकटेश भट ने शोक जताया।
24 घंटे से ज्यादा खाना बनाकर बनाया था विश्व रिकॉर्ड
शेफ दामू का नाम गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज है। दिसंबर 2010 में उन्होंने लगातार 24 घंटे 30 मिनट और 12 सेकंड तक खाना बनाकर रिकॉर्ड कायम किया था। इस दौरान उन्होंने 617 अलग-अलग व्यंजन तैयार किए थे।
वर्ष 2012 में उन्होंने मदुरै में लगभग 48.4 फीट लंबा डोसा बनाया। वहीं, 2014 में सिंगापुर में करीब 6,000 किलोग्राम वजन वाली विशाल करी डिश तैयार की थी।
डॉक्टरेट हासिल करने वाले पहले भारतीय पाक विशेषज्ञ
3 सितंबर 1954 को चेन्नई में जन्मे दामोदरन ने तारामाणी स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ होटल मैनेजमेंट से होटल मैनेजमेंट और कैटरिंग टेक्नोलॉजी की पढ़ाई की। वर्ष 2004 में मद्रास विश्वविद्यालय ने उन्हें होटल मैनेजमेंट और कैटरिंग टेक्नोलॉजी में डॉक्टरेट की उपाधि प्रदान की। उन्हें इस क्षेत्र में डॉक्टरेट हासिल करने वाले पहले भारतीय पाक विशेषज्ञ के रूप में जाना जाता है।
उन्होंने 1977 में तमिलनाडु पर्यटन विकास निगम में मैनेजमेंट ट्रेनी के रूप में करियर शुरू किया। बाद में उन्होंने पाक कला और शिक्षा के क्षेत्र में योगदान दिया।
टीवी शो से मिली घर-घर में पहचान
शेफ दामू ने ‘पोधिगई’ समेत कई तमिल टीवी चैनलों पर कुकिंग शो प्रस्तुत किए। विजय टीवी के लोकप्रिय कार्यक्रम ‘कुक विद कोमाली’ में जज की भूमिका निभाकर वे युवा दर्शकों के बीच भी लोकप्रिय हुए। अपने कार्यक्रमों के जरिए उन्होंने पारंपरिक तमिल और दक्षिण भारतीय व्यंजनों को लोकप्रिय बनाने में योगदान दिया।
उन्होंने पाक कला पर कई किताबें लिखीं और कैटरिंग की पढ़ाई करने वाले विद्यार्थियों को प्रशिक्षण देने में भी भूमिका निभाई। स्कूलों की मध्याह्न भोजन योजना के मेनू को बेहतर बनाने और भोजन तैयार करने वाले कर्मचारियों को प्रशिक्षण देने में भी उनका योगदान रहा।
यह भी पढ़ें: रेंगाटोला में रेत का अवैध परिवहन, 3 ट्रैक्टर-ट्रॉली जब्त
2025 में मिला था पद्म श्री
पाक कला और शिक्षा के क्षेत्र में योगदान के लिए शेफ दामू को कई पुरस्कार मिले। वर्ष 2021 में लंदन में उन्हें लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड से सम्मानित किया गया। वर्ष 2025 में भारत सरकार ने उन्हें पद्म श्री से सम्मानित किया था।
उनके निधन से भारतीय पाक कला जगत ने एक ऐसे विशेषज्ञ को खो दिया, जिन्होंने पारंपरिक व्यंजनों को पहचान दिलाने के साथ पाक कला को शिक्षा और तकनीक से जोड़ने में अहम भूमिका निभाई।

